आज सिद्धार्थ बाबू एक ऐसे IFS अधिकारी के रूप में पहचाने जाते हैं, जिनकी भाषा पर अच्छी पकड़ है। उन्हें कई भाषाओं का ज्ञान है।
UPSC Success Story: हर साल लाखों युवा UPSC की परीक्षा सिर्फ एक सपना लेकर देते हैं IAS बनने का सपना। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो रैंक मिलने के बाद भी अपनी दिल की सुनते हैं। केरल के सिद्धार्थ बाबू उन्हीं में से एक हैं। UPSC सिविल सेवा परीक्षा में सिद्धार्थ बाबू ने अपने दूसरे प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 15 हासिल की। यह रैंक इतनी अच्छी थी कि आराम से IAS मिल सकता था। लेकिन सिद्धार्थ ने वह रास्ता नहीं चुना, जिसे ज्यादातर लोग चुनते हैं। उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की जगह भारतीय विदेश सेवा यानी IFS को प्राथमिकता दी।
सिद्धार्थ का जन्म और शुरुआती पढ़ाई केरल में हुई। 12वीं के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री ली। पढ़ाई के दौरान ही उनका झुकाव सिविल सर्विस की तरफ हुआ। इसके बाद उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की। पहला प्रयास सफल नहीं रहा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दूसरी बार उन्होंने न सिर्फ परीक्षा पास की, बल्कि टॉप रैंक भी हासिल की। उनका झुकाव हमेशा से इंटरनेशनल रिलेशंस में था। इसलिए रैंक 15 आने के बावजूद उन्होंने IAS की जगह IFS को चुना। साल 2017 में वह भारतीय विदेश सेवा में शामिल हुए।
आज सिद्धार्थ बाबू एक ऐसे IFS अधिकारी के रूप में पहचाने जाते हैं, जिनकी भाषा पर अच्छी पकड़ है। उन्हें कई भाषाओं का ज्ञान है। यही वजह है कि कई मौकों पर उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेशी नेताओं के बीच अनुवादक की भूमिका में भी देखा गया है। हाल ही में 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान सिद्धार्थ बाबू प्रधानमंत्री मोदी के साथ नजर आए। यहां भी वे पीएम मोदी और विदेशी मेहमान के बीच ट्रांसलेटर की भूमिका निभा रहे थे।