UP Assembly Elections 2022 : कुशीनगर जिले के फाजिलनगर विधानसभा सीट पर चनऊ और कुशवाहा बिरादरी का दबदबा है। पूर्व में हुए चुनावों पर नजर डाले तो इस सीट से लगभग हर पार्टी के उम्‍मीदवार को मौका मिला है। फिर भी इलाके में बिजली और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं का टोटा है। फाजिलनगर विधानसभा कुशीनगर जिले की वह सीट है जहां बीजेपी, सपा और बसपा के बीच टक्‍कर रहती है।
UP Assembly Elections 2022 : कुशीनगर जिले की पड़रौना विधानसभा सीट छोड़कर फाजिलनगर सीट से चुनाव लड़ रहे स्वामी प्रसाद मौर्य की चौथी बार विधानसभा पहुंचने की राह आसान नहीं होगी। स्वामी प्रसाद मौर्य को यहां से 2012 से भाजपा विधायक रहे गंगा सिंह कुशवाहा के बेटे सुरेंद्र कुशवाहा उन्हें कड़ी टक्कर देते दिख रहे हैं। वहीं बहुजन समाज पार्टी ने इस सीट पर सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले के तहत संतोष तिवारी को पार्टी का प्रत्याशी घोषित किया है। कुशीनगर की फाजिलनगर सीट पर चनऊ और कुशवाहा बिरादरी की खासी संख्या है, वहीं मुस्लिम वोटर भी इस सीट पर निर्णायक साबित हो सकता है। अगर जातीय आंकड़ों को देखा जाये तो बसपा प्रत्याशी संतोष तिवारी भी इस सीट पर मुकाबले को त्रिकोणीय बना रहे हैं। बसपा से इस सीट से ब्राह्मण प्रत्याशी उतारकर भाजपा के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर दी है।
पड़रौना छोड़ फाजिलनगर पहुंचे स्वामी प्रसाद
स्वामी प्रसाद मौर्य कुशीनगर जिले की पड़रौना विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर एक उपचुनाव और दो चुनाव जीते थे। कभी मायावती के खास सिपहसलार रहे स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस बार पड़रौना की जगह फाजिलनगर सीट से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। स्वामी के सीट बदलने का कारण यहां से तीन बार विधायक रहे आरपीएन सिंह को माना जा रहा है। आरपीएन सिंह हाल में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं। माना जा रहा है कि आरपीएन सिंह के पड़रौना से चुनाव लड़ने की चर्चाओं के कारण मौर्य ने यह छोड़ दी थी। स्वामी प्रसाद मौर्य साल 2009 में आरपीएन सिंह से लोकसभा का चुनाव हार गये थे।
पिता के कामों को भुनाएंगे भाजपा के सुरेंद्र कुशवाहा
फाजिलनगर सीट से चुनाव लड़ रहे स्वामी प्रसाद मौर्य की यहां भी मुश्किलें कम नहीं दिख रही है। भाजपा के दबदबे वाली इस सीट से लगातार विधायक रहे गंगा सिंह कुशवाहा का टिकट काटकर उनके बेटे सुरेंद्र सिंह कुशवाहा को फाजिलनगर से प्रत्याशी बनाया है। कुशीनगर जिले के नारायनपुर कोठी के निवासी सुरेंद्र सिंह कुशवाहा कोइरी जाति से आते हैं। सुरेंद्र सिंह भी अपने पिता की तरह ही पेशे से शिक्षक हैं और राजनीति में यह उनकी पहली पारी है। माना जा रहा कि सुरेंद्र कुशवाहा को जनसंघ से राजनीति की शुरूआत करने वाले अपने पिता गंगा सिंह कुशवाहा की सियासी जमीन का लाभ उठा सकते हैं।
बसपा के वोटों के सहारे संतोष तिवारी
बसपा ने फाजिलनगर से संतोष तिवारी को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। संतोष तिवारी साल 1995 से बसपा में जुड़े हुए हैं। समाजसेवा के जरिए आमजनता में अपनी एक अलग पहचान है। इसके पहले भी वह बसपा से अपनी दावेदारी पेश कर चुके हैं। पार्टी की नीतियों से लंबे समय तक जुड़े रहने के कारण उन पर शीर्ष नेतृत्व ने भरोसा जताया है। बिना किसी राजनीतिक विरासत के वह बसपा के वोटों के सहारे चुनाव मैदान में है। जबकि कांग्रेस ने अभी इस सीट पर अपना प्रत्याशी नहीं घोषित किया है।
फाजिलनगर सीट पर जातिगत आंकड़े
3 लाख 40 हजार से अधिक वोटर वाले फाजिलनगर विधानसभा चुनाव में चनऊ और कुशवाहा बिरादरी का दबदबा है तो मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका में है। इस सीट पर करीब 90 हजार मुस्लिम मतदाता हैं। जबकि 55 हजार मौर्य-कुशवाहा वोटर हैं। इसके अलावा 50 हजार यादव वोटर हैं। वहीं दलित मतदाताओं की संख्या भी लगभग 80 हजार। इस सीट पर ब्राह्मण वोटर 30 हजार है, लेकिन ठाकुर वोटर बहुत बड़ी संख्या में नहीं है।