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Budget 2026: फिल्म इंडस्ट्री को नहीं मिली सीधी राहत, लेकिन क्रिएटिव सेक्टर पर सरकार का बड़ा दांव

Union Budget 2026-27: नए बजट में फिल्म इंडस्ट्री को सीधे तौर पर कोई विशेष राहत नहीं दी गई है, लेकिन सरकार ने क्रिएटिव सेक्टर पर बड़े दांव लगाने का संकेत दिया है। जो फिल्म और मनोरंजन इंडस्ट्रीज को भी फायदा पहुंचाएंगी।

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Feb 01, 2026
क्रिएटिव इंडस्ट्रीज में हुआ बदलाव (सोर्स: IMDb)

Union Budget 2026-27: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने Budget 2026-27 संसद में पेश कर दिया है। इस बजट में जहां आम आदमी टैक्स और महंगाई को लेकर अटकलें लगाए बैठा था, तो वहीं फिल्म और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री भी खास ऐलानों की उम्मीद में थी। हालांकि, इस बार फिल्म इंडस्ट्री को कोई सीधी राहत नहीं मिली, लेकिन सरकार ने क्रिएटिव इंडस्ट्रीज को देश की आर्थिक ग्रोथ का नया इंजन बताया है।

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फिल्म इंडस्ट्री को नहीं लेकिन क्रिएटिव सेक्टर में हुआ बदलाव

बजट स्पीच में वित्त मंत्री ने ऑरेंज इकॉनमी को आगे बढ़ाने की बात कही, जिसमें फिल्म, मीडिया, एंटरटेनमेंट, कला और संस्कृति जैसे सेक्टर शामिल हैं। सरकार का मानना है कि आने वाले वक्त में ये सेक्टर रोजगार, शहरी विकास और सर्विस इंडस्ट्री को मजबूती देंगे। हालांकि, फिल्म प्रोडक्शन, थिएटर या टिकट टैक्स को लेकर कोई बड़ा ऐलान नहीं किया गया, जिससे फिल्म इंडस्ट्री को थोड़ी निराशा मिली है।

इतना ही नहीं, Budget 2026 में एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVCG) सेक्टर पर खास ध्यान दिया गया है। वित्त मंत्री के अनुसार, ये सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है और उम्मीद है कि 2030 तक इसमें करीब 20 लाख प्रोफेशनल्स की जरूरत पड़ेगी। इसको नजर में रखते हुए सरकार ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज (IICT), मुंबई को सपोर्ट देने का ऐलान किया है। इसके द्वारा देशभर के 15,000 सेकेंडरी स्कूलों और 500 कॉलेजों में AVCG कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित होंगे। बता दें, इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में कॉन्सर्ट इकॉनमी को एक ऐसे सेक्टर के रूप में देखा गया है, जिसमें बड़ी उम्मीद हैं लेकिन अब तक इसका पूरा यूज नहीं हो पाया है। खबरों के अनुसार लाइव कॉन्सर्ट और इवेंट्स सिर्फ टिकट की कमाई तक सीमित नहीं होते, बल्कि इससे होटल, ट्रांसपोर्ट, सिक्योरिटी, विज्ञापन और लोकल बिजनेस को भी बड़ा फायदा होता है।

बढ़ता खर्च और डिजिटल टिकटिंग प्लेटफॉर्म कॉन्सर्ट

इसमें भारत में युवा आबादी, बढ़ता खर्च और डिजिटल टिकटिंग प्लेटफॉर्म कॉन्सर्ट इकॉनमी को सपोर्ट कर रहे हैं, लेकिन अब भी कई चुनौतियां मौजूद हैं। जिसमें बड़े इवेंट वेन्यू की कमी, विदेशी कलाकारों को भुगतान की जटिल प्रक्रिया और ढेरों सरकारी अनुमतियां शामिल हैं। जहां कई बार इवेंट ऑर्गनाइजर्स को 10 से 15 अलग-अलग परमिशन लेनी पड़ती हैं।

दरअसल, इकोनॉमिक सर्वे में सूचना और प्रसारण मंत्रालय लाइव एंटरटेनमेंट इवेंट्स के लिए सिंगल-विंडो परमिशन सिस्टम पर काम कर रहा है, जिसमें राज्य सरकारों की मंजूरी भी शामिल होगी। सरकार का मानना है कि इससे कॉन्सर्ट और लाइव एंटरटेनमेंट सेक्टर को मजबूती मिलेगी और भारत को एक ग्लोबल कॉन्सर्ट डेस्टिनेशन के रूप में उभरने का मौका मिलेगा।

Updated on:
01 Feb 2026 02:42 pm
Published on:
01 Feb 2026 02:38 pm
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