
Gouri Kishan Statement On Film Industry: तमिल-मलयालम एक्ट्रेस गौरी किशन ने फिल्म इंडस्ट्री में जेंडर भेदभाव और पुरुष प्रधान सोच को लेकर खुलकर बात की है। फिल्म ‘96’ में त्रिशा कृष्णन के किरदार जानू का यंग वर्जन निभाकर पहचान बनाने वाली गौरी ने बताया कि जब उन्होंने एक मौके पर अपनी बात रखी तो उन्हें नजरअंदाज किए जाने का अनुभव हुआ। एक्ट्रेस ने कहा कि महिलाओं को अक्सर अपनी बात कहने के बाद भी अनदेखा किए जाने की आदत हो जाती है, लेकिन अब इसके खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत है।
‘इंडिया टुडे राउंडटेबल केरलम’ में बातचीत के दौरान गौरी ने कहा कि केरल को देश के प्रोग्रेसिव राज्यों में गिना जाता है, लेकिन इसके बावजूद वहां पेट्रियार्की यानी पुरुष प्रधान सोच अभी भी दिखाई देती है। उनके मुताबिक, यह सोच रातों-रात खत्म नहीं हो सकती, क्योंकि यह लोगों की परवरिश और सोच का हिस्सा बन चुकी है।
गौरी ने यह भी कहा कि पेट्रियार्की को सिर्फ पुरानी पीढ़ी से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। फिल्म इंडस्ट्री में मिसॉजिनी यानी महिलाओं के प्रति भेदभाव की सोच को लेकर कहा कि उन्होंने खुद इसे अब भी मौजूद देखा है। एक्ट्रेस ने खास तौर पर कैमरे के पीछे महिलाओं की कम मौजूदगी और इंडस्ट्री में महिलाओं को मिलने वाली सीमित भूमिका का मुद्दा उठाया।
गौरी ने अपने हालिया अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि एक बार उनके को-एक्टर ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने गौर किया था कि जब उन्होंने अपनी बात रखी, तब वहां मौजूद लोग जमीन की तरफ देखने लगे थे।
गौरी ने जवाब दिया कि क्या उन्हें लगता है कि उन्होंने यह बात नोटिस नहीं की थी। इसके बाद उन्होंने कहा कि महिलाओं को अक्सर नजरअंदाज किए जाने की आदत हो जाती है, लेकिन इस रवैये के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। एक्ट्रेस ने यह भी कहा कि वह इस मायने में खुद को प्रिविलेज्ड मानती हैं कि वह एक शहर में पली-बढ़ीं और उन्हें अच्छी शिक्षा मिली। इसके बावजूद उन्हें ऐसे पुरुषों का सामना करना पड़ा, जो अब भी मानते हैं कि महिलाओं के पास दिमाग नहीं होता।
गौरी ने फिल्म के सेट से जुड़ा एक और अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने कैमरे के पीछे काम कर रही एक महिला के साथ काम किया था। उस महिला ने सेट पर दूसरी महिला को देखकर राहत महसूस की थी।
हालांकि, गौरी के मुताबिक, बाद में कुछ बड़े पुरुष क्रू मेंबर्स ने उस महिला की आलोचना करते हुए उसे ‘बहुत घमंडी’ बताया, जबकि गौरी का कहना था कि वह महिला सिर्फ अपना काम कर रही थी। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में महिला टेक्नीशियन के तौर पर काम करना और भी मुश्किल हो सकता है। हालांकि, इस मामले में उस महिला को एक 70 साल के प्रोग्रेसिव व्यक्ति का समर्थन मिला, जिसने उसके पक्ष में आवाज उठाई। गौरी ने साफ किया कि वह इस मुद्दे को सिर्फ ‘आदमी बनाम औरत’ की बहस के तौर पर नहीं देखतीं। उनके मुताबिक, असली मुद्दा महिलाओं को बराबर मौके मिलने और उनके जेंडर को उनकी सीमाओं की वजह न बनने देने का है।