
Jagan Gurjar Murder Case: जगन गुर्जर हत्याकांड के बाद एक बार फिर गैंगस्टर और डकैतों की दुनिया चर्चा में है। राजस्थान के भरतपुर-डीग इलाके से जुड़े जगन गुर्जर का नाम अपराध जगत में लंबे समय तक सुर्खियों में रहा। हालांकि, वो चंबल के पुराने दौर के उन कुख्यात डकैतों की तरह नहीं था, जो सालों तक बीहड़ों में राज करते थे। उसका नेटवर्क राजस्थान और चंबल से सटे इलाकों तक फैला हुआ बताया जाता था। अब उसकी हत्या के बाद अपराध की दुनिया, गैंगवार और डकैतों पर बनी फिल्मों को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है।
बॉलीवुड ने पिछले तीन दशकों में अंडरवर्ल्ड, गैंगवार और डकैतों पर कई ऐसी फिल्में बनाई हैं, जिन्होंने बॉक्स ऑफिस के साथ-साथ दर्शकों के दिलों पर भी गहरी छाप छोड़ी। इनमें कुछ फिल्में वास्तविक घटनाओं और अपराधियों से प्रेरित थीं, जबकि कुछ ने काल्पनिक किरदारों के जरिए अपराध की दुनिया की सच्चाई दिखाई। आइए जानते हैं ऐसी फिल्मों के बारे में।
महेश मांजरेकर के निर्देशन में बनी 'वास्तव' मुंबई अंडरवर्ल्ड की दुनिया पर आधारित सबसे चर्चित फिल्मों में गिनी जाती है। यह किसी एक गैंगस्टर की बायोपिक नहीं थी, लेकिन इसकी कहानी पर छोटा राजन, अरुण गवली और अमर नाइक जैसे अपराधियों का प्रभाव माना जाता है। फिल्म में एक साधारण युवक रघु हालात के कारण अपराध की दुनिया में कदम रखता है और देखते ही देखते बड़ा गैंगस्टर बन जाता है। अंत में उसकी मां ही उसकी जिंदगी का अंत करती है। फिल्म में संजय दत्त, नम्रता शिरोडकर, रीमा लागू, शिवाजी साटम और संजय नार्वेकर मुख्य भूमिकाओं में नजर आए।
राम गोपाल वर्मा की 'कंपनी' भारतीय अंडरवर्ल्ड पर बनी सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल है। इसे दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन के रिश्ते और बाद में दोनों के बीच हुए गैंगवार से प्रेरित माना जाता है। फिल्म में मलिक और चंदू के जरिए अपराध की दुनिया में दोस्ती, विश्वासघात और सत्ता की लड़ाई को दिखाया गया। इसमें अजय देवगन, विवेक ओबेरॉय, मोहनलाल, मनीषा कोइराला और अंतरा माली प्रमुख भूमिकाओं में थे।
यह फिल्म 1991 में मुंबई के लोखंडवाला में हुई चर्चित पुलिस मुठभेड़ पर आधारित थी। इसकी कहानी गैंगस्टर माया डोलास, जो अरुण गवली गैंग का सदस्य माना जाता था, और उसके गैंग के एनकाउंटर के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में विवेक ओबेरॉय ने माया डोलास, संजय दत्त ने एसीपी शमशेर खान, सुनील शेट्टी, तुषार कपूर, अरबाज खान और अमृता सिंह ने अहम किरदार निभाए।
अनुराग कश्यप की 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' किसी एक गैंगस्टर की कहानी नहीं, बल्कि धनबाद के कोयला माफिया, गैंगवार और अपराध की कई वास्तविक घटनाओं से प्रेरित फिल्म थी। इसमें पीढ़ियों तक चलने वाली दुश्मनी और सत्ता की लड़ाई दिखाई गई। फिल्म में मनोज बाजपेयी, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, रिचा चड्ढा, हुमा कुरैशी, पियूष मिश्रा, तिग्मांशु धूलिया और जैदीप अहलावत ने यादगार अभिनय किया।
मिलन लुथरिया की इस फिल्म के दो मुख्य किरदार हाजी मस्तान और दाऊद इब्राहिम से प्रेरित माने जाते हैं। फिल्म में दिखाया गया कि कैसे एक तस्कर अंडरवर्ल्ड का बड़ा नाम बनता है और उसका शागिर्द उससे भी बड़ा डॉन बनने की राह पकड़ लेता है। इसमें अजय देवगन ने सुल्तान मिर्जा, इमरान हाशमी ने शोएब खान, जबकि कंगना रनौत, प्राची देसाई और रणदीप हुड्डा अहम भूमिकाओं में नजर आए।
शेखर कपूर की 'बैंडिट क्वीन' भारत की सबसे चर्चित बायोपिक फिल्मों में गिनी जाती है। यह पूर्व डकैत फूलन देवी के जीवन पर आधारित थी। फिल्म में उनके बचपन के संघर्ष, शोषण, चंबल के बीहड़ों में डकैत बनने, बेहमई कांड, आत्मसमर्पण और बाद के जीवन को बेहद सशक्त तरीके से दिखाया गया। इसमें सीमा बिस्वास ने फूलन देवी, निर्मल पांडे ने विक्रम मल्लाह, गोपाल सिंह ने श्रीराम ठाकुर, सौरभ शुक्ला और मनोज बाजपेयी ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। यह फिल्म अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खूब सराही गई।
अभिषेक चौबे के निर्देशन में बनी 'सोनचिरैया' किसी एक डकैत की बायोपिक नहीं थी, बल्कि 1970 के दशक के चंबल के बीहड़ों में सक्रिय दस्यु गिरोहों की जिंदगी से प्रेरित एक काल्पनिक कहानी थी। फिल्म में अपराध, जातिगत संघर्ष, पुलिस कार्रवाई और इंसानियत के बीच जूझते डकैतों की कहानी दिखाई गई। इसमें सुशांत सिंह राजपूत ने लाखना, मनोज बाजपेयी ने डाकू सरदार मान सिंह, भूमि पेडनेकर, रणवीर शौरी और आशुतोष राणा ने दमदार अभिनय किया। भले ही फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकी, लेकिन आलोचकों ने इसे चंबल के बीहड़ों की सबसे वास्तविक फिल्मों में से एक माना।
आज जब जगन गुर्जर हत्याकांड सुर्खियों में है, तब एक बार फिर यह चर्चा तेज हो गई है कि अपराध की दुनिया सिर्फ खबरों तक सीमित नहीं रही। बॉलीवुड ने भी अलग-अलग दौर में इन कहानियों को पर्दे पर उतारकर दर्शकों को अपराध, सत्ता, बदले और इंसानी मनोविज्ञान की जटिल दुनिया से रूबरू कराया है।