
Hostel Hadsaa: हैलोवीन का माहौल हो और हॉरर फिल्मों की चर्चा न हो, ऐसा कैसे हो सकता है। भारतीय सिनेमा में जब भी डरावनी फिल्मों की बात होती है, तो रामसे परिवार का नाम जरूर याद आता है। 'वीराना', 'पुराना मंदिर' और 'पुरानी हवेली' जैसी फिल्मों से दर्शकों को डर और सस्पेंस का अलग अनुभव देने वाले रामसे परिवार की विरासत अब अगली पीढ़ी आगे बढ़ाने जा रही है। फिल्ममेकर नम्रता रामसे (Namrata Ramsay) अपनी फिल्म 'हॉस्टल हादसा' के जरिए हॉरर की दुनिया में नया चैप्टर जोड़ने की तैयारी में हैं।
रामसे ब्रदर्स (Ramsay brothers) ने अपनी फिल्मों के जरिए भारतीय सिनेमा में हॉरर शैली को एक खास पहचान दिलाई। 'वीराना', 'पुराना मंदिर' और 'पुरानी हवेली' जैसी फिल्मों ने डर, रहस्य और अलौकिक घटनाओं को पर्दे पर पेश करने का अपना अलग अंदाज बनाया। इन फिल्मों की कहानियों और डरावने माहौल ने दर्शकों के बीच एक खास जगह बनाई।
अब इसी विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी नम्रता रामसे ने संभाली है। उनकी फिल्म 'हॉस्टल हादसा' को रामसे परिवार की हॉरर परंपरा की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।
नम्रता रामसे की 'हॉस्टल हादसा' डर, सस्पेंस और अलौकिक घटनाओं की दुनिया में दर्शकों को ले जाने की तैयारी में है। फिल्म को लेकर सबसे बड़ी उत्सुकता यही है कि क्या यह रामसे परिवार की पुरानी हॉरर फिल्मों जैसा रोमांच पैदा कर पाएगी। हॉरर सिनेमा का अंदाज समय के साथ बदल रहा है। ऐसे में नम्रता के सामने परिवार की पहचान को बनाए रखने के साथ इस शैली को नए दौर के दर्शकों तक पहुंचाने की चुनौती भी है। अब देखना होगा कि 'हॉस्टल हादसा' रामसे परिवार की विरासत को किस अंदाज में आगे बढ़ाती है।
बता दें, 70 और 80 के दशक में रामसे ब्रदर्स ने भारतीय सिनेमा में हॉरर फिल्मों को एक अलग पहचान दिलाई। इस दौरान उन्होंने करीब 45 फिल्में बनाईं और पर्दे पर ऐसा खौफ रचा कि उनका नाम ही हॉरर सिनेमा छा गया। दरअसल, समय के साथ फैंस की पसंद और हॉरर फिल्मों का अंदाज भी बदल गया है। आज की युवा पीढ़ी को 'लक्ष्मी', 'स्त्री' और 'भूल भुलैया' जैसी हॉरर-कॉमेडी फिल्में पसंद आती हैं, जबकि कुछ युवा दर्शकों को रामसे ब्रदर्स की पुरानी फिल्मों का अंदाज थोड़ा अटपटा लग सकता है, लेकिन हर दौर का अपना सिनेमा और अपनी पसंद होती है। अपने समय में रामसे बंधुओं ने हॉरर जॉनर को नई पहचान और अलग मुकाम दिया था। यही वजह है कि भारतीय हॉरर सिनेमा की चर्चा उनके नाम के बिना अधूरी मानी जाती है।