
Swara BhaskarJauhar Controversy: संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावत'रिलीज के कई साल बाद एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह फिल्म का कोई नया विवाद नहीं, बल्कि इसमें दिखाए गए जौहर के चित्रण को लेकर उठे सवाल हैं। एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने फिल्म में जौहर के सीन को लेकर अपनी आपत्ति जाहिर की थी। अब फिल्म के सह-लेखक प्रकाश कपाड़िया ने इस पूरे मामले पर अपनी बात रखी है और कहा है कि फिल्म में उस दौर की परिस्थितियों को रिसर्च और ऐतिहासिक स्रोतों के आधार पर दिखाने की कोशिश की गई थी।
प्रकाश कपाड़िया ने एचटी सिटी से बात करते हुए बताया कि 'पद्मावत' की कहानी तैयार करते समय टीम ने उपलब्ध ऐतिहासिक सामग्री और रिसर्च को आधार बनाया था। उनके मुताबिक फिल्म में जिस तरह की घटनाओं को दिखाया गया, उन्हें उस समय की परिस्थितियों के संदर्भ में समझना जरूरी है।
उनका कहना है कि दर्शक किसी फिल्म को अपने नजरिए और सोच के अनुसार अलग-अलग तरीके से समझ सकते हैं। ऐसे में एक ही सीन में किसी व्यक्ति को ऐतिहासिक प्रस्तुति लग सकता है, जबकि किसी दूसरे दर्शक को उसमें समस्या नजर आ सकती है।
जौहर के दृश्य को लेकर कपाड़िया ने कहा कि फिल्म में इसे उस दौर की वास्तविक परिस्थितियों के हिस्से के तौर पर पेश किया गया था। उन्होंने उस समय के युद्ध और राजपूत परंपराओं का भी संदर्भ दिया।
कपाड़िया के मुताबिक जब युद्ध में जीत की संभावना लगभग खत्म हो जाती थी, तब राजपूत योद्धाओं के युद्ध में अंतिम लड़ाई के लिए उतरने की परंपरा से जुड़ी घटनाएं इतिहास में दर्ज हैं। पुरुष योद्धाओं के केसरिया वस्त्र धारण कर युद्ध में जाने की परंपरा को भी इसी संदर्भ में देखा जाता है।
फिल्म रिलीज के बाद भी स्वरा भास्कर की ओर से जौहर के चित्रण को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। उन्होंने फिल्म में इस घटना को जिस अंदाज में पेश किया गया, उसे समस्याग्रस्त बताया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा।
हालांकि प्रकाश कपाड़िया का कहना है कि उन्होंने स्वरा की हालिया टिप्पणियों को विस्तार से फॉलो नहीं किया है। इसलिए वह उनके बयान पर व्यक्तिगत प्रतिक्रिया देने के बजाय फिल्म के निर्माण के पीछे की सोच पर बात करना पसंद करेंगे।
‘पद्मावत’ का विवाद नया नहीं है। फिल्म की रिलीज से पहले ही इसके खिलाफ कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए थे। फिल्म को लेकर ऐतिहासिक तथ्यों और कथानक के चित्रण पर सवाल उठाए गए थे। विरोध इतना बढ़ गया था कि रिलीज से पहले ही फिल्म को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई थी।
कपाड़िया के मुताबिक कई लोगों ने फिल्म को सिनेमाघरों में देखने से पहले ही उसके खिलाफ राय बना ली थी। उनके अनुसार वर्षों बाद भी उसी फिल्म को लेकर चर्चा जारी रहना बताता है कि‘पद्मावत’ ने दर्शकों के बीच एक गहरी बहस को जन्म दिया था।
प्रकाश कपाड़िया ने यह भी कहा कि किसी फिल्म को देखने का अनुभव दर्शक की मानसिकता और उसके उद्देश्य पर भी निर्भर करता है। कोई दर्शक कहानी और सिनेमा के नजरिए से फिल्म देख सकता है, जबकि कोई उसमें विवादित पहलुओं को तलाश सकता है।
फिलहाल स्वरा भास्कर की टिप्पणी और प्रकाश कपाड़िया के जवाब ने एक बार फिर ‘पद्मावत’ के जौहर दृश्य को चर्चा में ला दिया है। फिल्म भले ही कई साल पुरानी हो, लेकिन इतिहास, सिनेमा और उसके चित्रण को लेकर बहस आज भी खत्म होती नजर नहीं आ रही है।