
National Flag Protest: अभिनेता प्रकाश राज ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर नाराजगी जताई है। दोनों नेताओं को दिल्ली के जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज के साथ प्रदर्शन करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करने के मामले में हिरासत में लिया गया था। प्रकाश राज ने एक वीडियो साझा कर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए और कहा कि प्रदर्शन की जगह बदली जा सकती है, लेकिन लोगों की आवाज नहीं दबाई जा सकती। उन्होंने चेतावनी दी कि अब पूरा देश ही जंतर-मंतर बन जाएगा।
प्रकाश राज ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए सवाल उठाया कि राष्ट्रीय ध्वज लेकर विरोध प्रदर्शन करने पर पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की जा रही है, महिला प्रदर्शनकारियों से बदसलूकी हो रही है और पत्रकारों को धक्का दिया जा रहा है, लेकिन ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही।
अभिनेता ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ गाड़ियों में पुलिस की वर्दी और लाठियां रखी हुई थीं और पुलिस उन लोगों को रोकने के बजाय जाने दे रही थी। हालांकि, ये आरोप प्रकाश राज ने अपने वीडियो में लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका भारतीय ध्वज लेकर जंतर-मंतर पहुंचे थे। उनका विरोध इस बात को लेकर था कि वहां से प्रदर्शन की अनुमति वाली जगह का दर्जा हटा दिया गया है। प्रकाश राज ने सवाल किया कि आखिर सरकार विरोध करने वालों को लेकर इतनी सख्त कार्रवाई क्यों कर रही है।
प्रकाश राज ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति से जुड़े नियमों और रामलीला मैदान को विकल्प के तौर पर दिए जाने पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, रामलीला मैदान पूरे साल में केवल दो दिन ही खाली मिलता है और वहां प्रदर्शन करने के लिए 50,000 रुपये तथा इतनी ही राशि जमा कराने की शर्त रखी जाती है।
उन्होंने कहा कि अगर लोगों को अपनी बात रखने के लिए दूसरी जगह भेजा जा रहा है, तो उन्हें अंडमान-निकोबार, किसी रेगिस्तान या हिमालय की चोटी पर जाकर प्रदर्शन करने के लिए भी कहा जा सकता है। अभिनेता ने कहा कि प्रदर्शन की जगह बदली जा सकती है और लोगों को रोका जा सकता है, लेकिन देश की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, 'पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा।'
पुलिस के मुताबिक, सौरव दास और आशुतोष रांका को मंगलवार सुबह उस समय हिरासत में लिया गया, जब वे कथित तौर पर बैरिकेड पार करके बिना अनुमति जंतर-मंतर क्षेत्र में दाखिल हुए। उन पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाने और राष्ट्रीय ध्वज फहराने का भी आरोप है।
पुलिस ने दोनों पर बिना अनुमति प्रवेश करने, निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने, शांति बनाए रखने के लिए पहले भरे गए बॉन्ड की शर्तें तोड़ने और सरकारी कर्मचारी को सरकारी काम करने से रोकने जैसे आरोप लगाए हैं।
दोनों नेताओं के वकील अभिष्ट हेला ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट के बाहर मीडिया से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने अदालत के सामने घटनाक्रम को गलत तरीके से पेश किया, जिसके चलते दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।