
Sunita Ahuja In LockUpp 2: लॉकअप सीजन 2 में सुनीता आहूजा का हाल ही में ब्रेकडाउन देखने को मिला। जिस तरह से सुनीता शो में खाने की कमी को देखते हुए टूट गईं और उन्होंने शो के मेकर्स से उन्हें निकालने के लिए कहा, उसके बाद सोशल मीडिया पर भी हर कोई उनके बारे में बात कर रहा है। कई लोगों ने सुनाता आहूजा के गाली-गलौज को लेकर भी अपनी राय साझा की है। हालांकि ज्यादातर लोगों ने उनके यूं खुलेआम गालियां देने पर आपत्ति जताई और कहा कि बड़े होने के नाते उन्हें कम से कम इतनी मर्यादा तो रखनी ही चाहिए। सुनीता आहूजा लगातार इन दिनों सुर्खियों में बनी हुई हैं।
सुनीता आहूजा सातवें दिन भेजे गए खाने के सामान पर गुस्सा हो गईं और उन्होंने खाने से मना कर दिया, क्योंकि कई दूसरे कंटेस्टेंट ने भी नहीं खाया था। उन्होंने कहा कि क्योंकि उनमें से कुछ विरोध नहीं कर रहे थे, इसलिए उन्हें इस तरह गुमराह किया जा रहा है। सुनीता ने गाली-गलौज करते हुए कहा, 'क्या अब हमें खाने के लिए भीख मांगनी पड़ेगी? आप सभी को मेरे साथ खड़ा होना चाहिए। मेरे सभी बच्चे भी भूखे हैं। सूप का स्वाद गाय के पेशाब जैसा है।'
जब सुनीता को उतना खाना नहीं मिला जितना वो खाना चाहती थीं और बाकी कंटेस्टेंट्स को भी उनके हिस्से का खाना नहीं मिला तो सुनीता रोने लगीं। उन्होंने रोते हुए कहा कि उन्हें बच्चों की याद आ रही है और उन्हें घर जाना है। इसके अलावा जब शो के बाकी कंटेस्टेंट्स सुनीता को समझाना चाह रहे थे तो सुनीता ने मेकर्स को गाली गलौज करना भी शुरू कर दिया। बस फिर क्या था इसके बाद सोशल मीडिया पर सुनीता को आड़े हाथों ले लिया गया और कई लोगों ने उन पर निशाना साधना शुरू कर दिया।
सुनीता आहूजा को लेकर एक यूजर ने सोशल मीडिया पर लिखा- अगर आप खुद को घर का सबसे बड़ा सदस्य मानते हैं और संस्कार, मर्यादा व अध्यात्म की बातें करते हैं, तो आपकी भाषा में भी वही गरिमा दिखाई देनी चाहिए। गाली-गलौज का इस्तेमाल आपके संदेश को विरोधाभासी बना देता है। सम्मान सिर्फ विचारों से नहीं, बल्कि शब्दों और व्यवहार से भी झलकता है।
कुछ दिन पहले लॉकअप में ही सुनीता आहूजा ने गोविंदा के धोखा देने पर भी बात की थी। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें कभी इस बात का दुख नहीं होता, तो सुनीता ने बेहद भावुक अंदाज में कहा कि उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा उनके बच्चे हैं। उन्होंने बताया कि उनका पूरा ध्यान अपने परिवार और बच्चों पर रहता है और वही उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता हैं।
सुनीता ने ये भी कहा कि किसी इंसान को हर समय नियंत्रित करना संभव नहीं होता। अगर कोई व्यक्ति कुछ करना चाहता है तो उसे चौबीस घंटे रोककर नहीं रखा जा सकता। इसलिए उन्होंने अपने जीवन में शांति और सुकून को ज्यादा महत्व देना सीख लिया है।