Thalapathy Vijay Family Dispute Controversies: तमिलनाडु में ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद अब थलापति विजय सीएम की कुर्सी के काफी करीब पहुंच चुके हैं। इसी बीच उनके पारिवारिक विवाद भी एक बार फिर चर्चाओं में आ गए हैं।
Thalapathy Vijay Family Dispute Controversies: दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार थलापति विजय इन दिनों सिर्फ अपनी फिल्मों या राजनीति में ऐतिहासिक जीत की वजह से ही नहीं, बल्कि अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। जहां एक ओर उनकी पार्टी की सफलता ने उन्हें जनता का ‘जननायक’ बना दिया है, वहीं दूसरी तरफ उनके परिवार से जुड़े कई ऐसे पहलू सामने आ रहे हैं, जो उनके व्यक्तित्व को और भी गहराई से समझने का मौका देते हैं।
विजय की जिंदगी सिर्फ स्टारडम और सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि इसमें संघर्ष, रिश्तों के उतार-चढ़ाव और भावनात्मक पहलुओं का भी एक लंबा सिलसिला छिपा हुआ है। आइए जानते हैं उनके परिवार से जुड़ी वो तमाम कहानियां, जो आज फिर चर्चा में हैं।
थलापति विजय का असली नाम जोसेफ विजय चंद्रशेखर है। उनका जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ, जहां सिनेमा पहले से ही रचा-बसा था। उनके पिता एस. ए. चंद्रशेखर तमिल इंडस्ट्री के जाने-माने निर्देशक, निर्माता और लेखक रहे हैं। उन्होंने अपने करियर में कई सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्में बनाई हैं और अपने बेटे विजय को भी शुरुआती दौर में लॉन्च किया।
वहीं उनकी मां शोभा चंद्रशेखर एक जानी-मानी प्लेबैक सिंगर, संगीतकार और लेखिका हैं। दिलचस्प बात यह है कि विजय का परिवार धार्मिक रूप से भी विविधता से भरा हुआ है- पिता ईसाई और मां हिंदू हैं। इस मिले-जुले सांस्कृतिक माहौल ने विजय की सोच को काफी व्यापक बनाया।
विजय के जीवन का सबसे भावनात्मक और दर्दनाक अध्याय उनकी छोटी बहन विद्या से जुड़ा है। विद्या का निधन तब हो गया था जब वो महज 2 साल की थीं। इतनी कम उम्र में बहन को खो देना विजय के लिए गहरा सदमा था।
कहा जाता है कि इस घटना ने उनके व्यक्तित्व पर गहरा असर डाला। आज भी विजय अपनी बहन को याद करते हैं और उनकी याद में उन्होंने अपने प्रोडक्शन हाउस का नाम ‘वीवी प्रोडक्शन्स’ रखा, जो ‘विद्या-विजय’ का प्रतीक माना जाता है।
विजय की निजी जिंदगी का एक अहम हिस्सा उनकी शादी रही है। उनकी पत्नी (अब पूर्व पत्नी के रूप में चर्चित) संगीता सोरनलिंगम मूल रूप से श्रीलंका की तमिल हैं और लंदन में पली-बढ़ी हैं।
बताया जाता है कि संगीता पहले विजय की बहुत बड़ी फैन थीं। दोनों की मुलाकात लंदन में हुई और यही मुलाकात धीरे-धीरे रिश्ते में बदल गई। 25 अगस्त 1999 को दोनों ने हिंदू और ईसाई रीति-रिवाजों से शादी की।
शादी के बाद संगीता ने सिर्फ एक पत्नी की भूमिका ही नहीं निभाई, बल्कि विजय के करियर में भी अहम योगदान दिया। वे उनकी कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग से भी जुड़ी रहीं और लंबे समय तक उनकी स्टाइलिंग संभालती रहीं।
करीब 25 साल तक साथ रहने के बाद अब विजय और संगीता के रिश्ते में खटास की खबरें सामने आ रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों के बीच अनबन बढ़ने के बाद तलाक की अर्जी तक दायर की जा चुकी है।
हालांकि इस मामले पर दोनों की ओर से आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन फैंस इस खबर से काफी भावुक हैं। उनके लिए यह जोड़ी सिर्फ स्टार कपल नहीं, बल्कि एक आदर्श रिश्ते की मिसाल मानी जाती थी।
विजय और संगीता के दो बच्चे हैं- बेटा जेसन संजय और बेटी दिव्या साशा। विजय के बेटे जेसन संजय का जन्म 2000 में हुआ था। वे अब फिल्म निर्देशन के क्षेत्र में अपना करियर बनाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने फिल्ममेकिंग की पढ़ाई भी की है और इंडस्ट्री में धीरे-धीरे कदम बढ़ा रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि पारिवारिक विवादों के दौरान जेसन ने अपने तरीके से प्रतिक्रिया भी दी थी, जिससे साफ होता है कि वे अपने विचारों को लेकर स्पष्ट हैं।
वहीं बेटी दिव्या साशा 2005 में जन्मी हैं और मीडिया से दूरी बनाए रखना पसंद करती हैं। हालांकि बचपन में वे विजय की फिल्म ‘थेरी’ में नजर आ चुकी हैं। फिलहाल वो अपनी पढ़ाई और निजी जिंदगी पर ध्यान दे रही हैं।
विजय के जीवन का सबसे विवादित अध्याय उनके पिता के साथ मतभेद रहा है। एक समय ऐसा भी आया जब विजय को अपने ही पिता के खिलाफ कानूनी कदम उठाना पड़ा।
दरअसल, एस. ए. चंद्रशेखर ने ‘ऑल इंडिया थलापति विजय मक्कल इयक्कम’ नाम से एक संगठन/पार्टी बनाई थी। विजय का आरोप था कि उनके नाम और छवि का इस्तेमाल राजनीतिक और भीड़ जुटाने के लिए किया जा रहा है। इस बात से नाराज होकर विजय ने अपने माता-पिता समेत 11 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया और कोर्ट से अपील की कि उनके नाम का गलत इस्तेमाल न किया जाए।
ये मामला उस समय काफी चर्चा में रहा और फैंस के लिए यह खबर चौंकाने वाली थी कि एक बेटा अपने ही पिता के खिलाफ कोर्ट पहुंच गया।
हालांकि समय के साथ रिश्तों में नरमी आई है। आज जब विजय राजनीति में बड़ी जीत हासिल कर चुके हैं, तो उनके पिता भी उनकी इस सफलता से बेहद खुश हैं। ये बदलाव इस बात का संकेत है कि भले ही रिश्तों में दरार आई हो, लेकिन खून के रिश्ते आखिरकार अपनी जगह बना ही लेते हैं।
विजय का पूरा परिवार कला और सिनेमा से जुड़ा रहा है। यही वजह है कि उनके व्यक्तित्व में अभिनय, संवेदनशीलता और नेतृत्व- तीनों का मिश्रण देखने को मिलता है। आज जब वो राजनीति में भी मजबूत पकड़ बना चुके हैं, तो ये साफ है कि उनके जीवन के अनुभव- चाहे वो पारिवारिक हों या पेशेवर- उन्हें एक अलग पहचान देते हैं।