मकसूदपुर में एक ही दिन में दो जनाजे निकले। जो बेटा मुंबई से अपने बीमार पिता की सेवा करने आया था, उसकी ही पिता के सामने मौत हो गई। जवान बेटे की मौत का सदमा बुजुर्ग पिता सह नहीं पाए और कुछ ही घंटों में उन्होंने भी दम तोड़ दिया।
मकसूदपुर गांव के 70 वर्षीय रफीक खां लंबे समय से गुर्दे (किडनी) की बीमारी से जूझ रहे थे। उनका इलाज आगरा के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। रफीक का 40 वर्षीय बेटा जकील पिछले 10-15 साल से मुंबई में सिलाई का काम करता था और वहीं अपने परिवार के साथ रहता था। जैसे ही उसे पिता की गंभीर हालत का पता चला, वह सब कुछ छोड़कर पिछले रविवार को आगरा पहुंच गया। एक हफ्ते तक अस्पताल में पिता की सेवा करने के बाद, जकील 19 मार्च को उन्हें डिस्चार्ज कराकर गांव मकसूदपुर ले आया ताकि सब साथ मिलकर ईद मना सकें।
घर पहुंचने की खुशी अभी चंद घंटे भी नहीं टिकी थी कि रात में अचानक जकील के सीने में तेज दर्द उठा। आनन-फानन में गांव के ही एक निजी चिकित्सक को बुलाया गया। डॉक्टर ने दर्द कम करने के लिए दवा दी और एक इंजेक्शन भी लगाया, लेकिन जकील की हालत बिगड़ती चली गई। कुछ ही देर में जकील ने दम तोड़ दिया।
जकील का शव जैसे ही घर के आंगन में रखा गया, बीमार पिता रफीक खां की हालत और बिगड़ गई। जवान बेटे का बेजान शरीर देखकर वह सुध-बुध खो बैठे। जिस बेटे के सहारे वह घर लौटे थे, उसका जनाजा उनके सामने था। यह सदमा रफीक खां बर्दाश्त नहीं कर सके और बेटे की मौत के कुछ ही घंटों बाद उन्होंने भी दम तोड़ दिया। 24 घंटे के भीतर पिता-पुत्र की मौत ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है।
जकील की पत्नी और बच्चों के मुंबई से गांव पहुंचने पर दोपहर दो बजे नमाज के बाद पिता -पुत्र के शवों को गमगीन माहौल मे सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
नूहखेड़ा, गांव मक़सूदपुर के पूर्व प्रधान बाबू खाँ ने बताया कि गांव के ही मृतक रफीक खां पुत्र निस्सू खां के चार बेटे थे। मृतक जकील दूसरे नम्बर का पुत्र था। वह गत 10-15 वर्षो से मुंबई में रह कर कपड़े की सिलाई का कार्य करता था। पिता के हॉस्पिटल मे भर्ती होने की जानकारी मिलने पर वह उन्हे देखने मुंबई से आया था। जहां गत गुरुवार रात्रि में अचानक सीने मे दर्द उठने के बाद उसकी मृत्यु हो गयी। अकील अपने पीछे अपनी पत्नी के अलावा चार बच्चे छोड़ गया है। जकील का बडा बेटा लगभग 16 वर्ष का है।