ग्रामीण बोले सरकार आबादी क्षेत्र के हिसाब से नहीं दे रही मुआवजा।
एटा। देश का सबसे लम्बा राजमार्ग ग्रांट ट्रंक रोड, जिसे आप जीटी रोड के नाम से जानते हैं, ये नए स्वरूप में नजर आएगा। अलीगढ़ तक इस मार्ग पर सिक्स लेन के तहत कार्य लगभग पूरा होने की ओर है, इसके बाद अब अलीगढ़ से आगे एटा की ओर की तैयारी चल रही है। इसके लिए जमीन अधिग्रहण के लिए भी कार्रवाई शुरू हो गई है, लेकिन जमीन अधिग्रहण में मिलने वाले मुआवजे को लेकर किसानों में आक्रोश पनप रहा है।
ये है किसानों के लिए आफत
अलीगढ़ से आगे एटा की ओर जो इस रोड के किनारे की जमीन अधिग्रहीत की जा रही है, उसका मुआवजा कृषि भूमि के हिसाब से तय किया जा रहा है। गांव नगला इमिलिया के पूर्व प्रधान ग्रीष यादव ने बताया कि जीटी रोड पर कई जगह आबादी क्षेत्र घोषित है, इसके बाद भी मुआवजा कृषि भूमि के हिसाब से तय किया जा रहा है। पुठिया थाना पिलुआ के रहने वाले सुरेन्द्र यादव ने बताया कि उनकी जीटी रोड के किनारे दो बीघा जमीन है। इस जमीन की रजिस्ट्री वाणिज्यक है, लेकिन मुआवजे के लिए इस जमीन को भी कृषि जमीन में दर्शाया गया है।
न्यायालय की शरण में जाने को हैं तैयार
पूर्व प्रधान ग्रीष यादव ने बताया कि एनएचएआई के अधिकारियों द्वारा कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। इन अधिकारियों से कई बार मिल चुके हैं, लेकिन वे कोई भी बात मानने को तैयार नहीं है। इसलिए फैसला ये लिया गया है कि अपनी आबादी क्षेत्र और कॉमर्शियल रजिस्ट्री वाली जमीन के उचित मुआवजे को लेकर न्यायालय की शरण में जाएंगे।
फोर लेन के हिसाब से मिला मुआवजा
जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई लगभग शुरू कर दी गई है। जमीन जितनी हाईवे में जानी है, उसका चिन्हीकरण करते हुए निशान भी लगा दिए गए हैं। ग्राम पंचायत बरई के लेखपाल चेतराम वर्मा ने बताया कि जो जमीन में निशान लगाए गए हैं, वो सिक्स लेन के हिसाब से लगाए गए हैं, लेकिन अभी उनके पास जो नक्शा है, वो सिर्फ फोर लेन के हिसाब से ही जमीन अधिग्रहण का है। सरकार ने बाद में इसके सिक्स लेन होने के मामले में शासनादेश जारी किया है, उसका अभी तक कोई नक्शा नहीं मिला है। इतना जरूर है, कि जो चिन्ह लगाए गए हैं, वो सिक्स लेन के हिसाब से लगाए गए हैं।