डॉ. भीमराव अम्बेडकर पुरूष अस्पताल के 8 विशेषज्ञ डाक्टरों ने काम के बोझ से तंग आकर सामूहिक रूप से अपना इस्तीफा दिया है
इटावा. इटावा के डॉ. भीमराव अम्बेडकर पुरूष अस्पताल के 8 विशेषज्ञ डाक्टरों ने काम के बोझ से तंग आकर सामूहिक रूप से अपना इस्तीफा दिया है। आठ डाक्टरों के इस्तीफे के बाद अब केवल छह डाक्टरों पर पूरे अस्पताल की जिम्मेदारी है। सभी डाक्टरों ने सीएमएस/सीएमओ को पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने इस्तीफा देने का कारण स्पष्ट बताया है। डॉक्टरों का कहना है कि जिला चिकित्सालय में कार्यरत सभी चिकित्सक, पोस्टमार्टम, इमरजेंसी, बीआरसी कैम्प, कोर्ट डयूटी, जेल डयूटी, विकलांग बोर्ड, वीआईपी डयूटी, तहसील दिवस, ओपीडी, ओटी, नसबंदी केन्द्र व स्वास्थ्य मेले में लगने वाली डयूटी के कारण ज्यादा कार्य का दबाव महसूस कर रहे हैं, जिससे मानसिक व शारीरिक तौर से सभी डॉक्टर परेशान हैं।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर राजकीय सयुक्त चिकित्सालय पुरूष के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एस.एस भदौरिया ने इस मामले में कहा कि डॉक्टरों के इस्तीफे से अस्पताल की परेशानी बढ़ेगी। जिन 8 डाक्टरों के द्वारा सामूहिक रूप से इस्तीफा दिया गया है, उनकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई है। स्वास्थ्य महानिदेशक के साथ अपर निदेशक कानपुर मंडल, जिलाधिकारी व मुख्य चिकित्साधिकारी को भी अवगत करा दिया गया है। इस्तीफा शासन के द्वारा ही मंजूर किया जाता है। इस्तीफे के संबंध में शासन को भी जानकारी दी गई है। डॉ. भदौरिया का कहना है कि अगर डाक्टरों ने अपना इस्तीफा वापस नहीं लिया, तो अस्पताल के लिए परेशानी बढ़ सकती है।
सीएमओ के असहयोग से परेशान डॉक्टर्स
सामूहिक इस्तीफा देने वालों डाक्टरों का कहना है कि उनके किसी भी कार्य में सीएमओ सहयोग नहीं कर रहे है। कई बार उन्हें समस्याओं से अवगत कराया गया है लेकिन आज तक कोई भी सुनवाई नहीं हुई। जिला अस्पताल में लगभग एक दर्जन इमरजेंसी मेडीकल आफीसर (ईएमओ) की आवश्यकता है, लेकिन दो ही ईएमओ के भरोसे काम चल रहा है। इसी कारण से विशेषज्ञ डाक्टरों को इमरजेंसी डयूटी करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। सीएमओ अपने स्तर से ईएमओ की व्यवस्था करा सकते हैं। लेकिन वह किसी भी कार्य में सहयोग नहीं कर रहे है। इसी लिए मजबूरी में इस्तीफा देना पड़ा।
जिला अस्पताल में 230 बैंड वर्तमान में संचालित हो रहे हैं। वैसे भी काफी लम्बे समय से विशेषज्ञ डाक्टरों का आभाव जिला अस्पताल में चल रहा है। जो डॉक्टर कार्यरत है उनसे मरीजों को देखने के साथ इमरजेंसी डयूटी, वीआईपी डयूटी, पोस्टमार्टम, कोर्ट, बीआरसी कैम्प, विकलांग बोर्ड आदि कार्य कराए जाते है, जिससे कि डाक्टरों पर काम का बोझ ज्यादा रहता है।
बढ़ सकती है अस्पताल की परेशानी
जिन डॉक्टरों द्वारा इस्तीफा दिया गया है, उनके द्वारा ओपीडी में काफा संख्य में मरीज हर रोज देखे जाते हैं। वहीं अस्पताल में 230 बैंड संचालित हैं, जिसके लिए और 60 डॉक्टरों की जरूरत है। अस्पताल में पहले 14 डॉक्टर थे लेकिन इनमें से 8 के द्वारा इस्तीफा दिए जाने से परेशानी बढ़ सकती है।
इस्तीफा देने वालों में रेडियालाजिस्ट डॉ. पारितोष शुक्ला, आई सर्जन डॉ. संजीव कुमार, डॉ. मोहित सिंघल, डॉ. जयदेश कुमार, आर्थाे सर्जन डॉ. विष्णु मेहरोत्रा, डॉ. अभिषेक स्वर्णकार, सर्जन डॉ. पीयूष तिवारी व डॉ. मंगल सिंह शामिल हैं।