
इटावा. जीवित पशुओं के निर्यात को लेकर देश व्यापी आन्दोलन का असर इटावा में भी देखने को मिला। यहां आचार्य श्री 108 विनम्र सागर जी महाराज के सानिध्य में विश्व जैन संगठन के नेतृत्व में सकल जैन समाज ने अपना विरोध प्रकट किया और एक स्वर में कहा कि जीवित पशुओं के निर्यात पर रोक लगायी जाए।
आचार्य विनम्र सागर ने कहा कि पशुओं को पालना अच्छा कार्य है, लेकिन उनको बेचना सबसे बड़ा पाप है। आज मनुष्य पशुओं के उपयोग करने के बाद उन्हें कत्लखाने के हवाले कर देता है जो कि सबसे ज्यादा चिंता की बात है। अंहिसा प्रेमी समुदाय इस ज्वलंत समस्या के लिए आगे आएं और कत्लखाने में कट रहे पशुओं को बचाएं और काटने वाले को जेल पहुंचाने का कार्य करें।
लालपुरा जैन धर्मशाला में विरोध सभा को सम्बोधित करते हुए विश्व जैन संगठन अध्यक्ष आकाशदीप जैन बेटू ने कहा कि भारत में निर्यात बढ़ने के बाद सरकार द्वारा पहली बार प्रति 3 माह में एक लाख पशुओं को भेजने के प्रस्ताव के बाद नागपुर से पहली बार 30 जून को जाने वाली फ्लाइट कैसिंल कर दी गयी थी, लेकिन नासिक से 2 जुलाई को उस हफ्ते की तीसरी फ्लाइट में 1500 बकरें शारजाह भेजे जाना स्वीकार नहीं है।
पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र नशियां जी अध्यक्ष संजीव जैन संजू ने कहा कि नवम्बर 2014 में 5 वर्षों में आयोजित होने वाले नेपाल के प्रसिद्ध गढ़ीमाई उत्सव में दी जाने वाली बलि हेतु भारत से अनाधिकृत रूप से ले जाये जाने वाले 4 लाख पशुओं के निर्यात पर गृह मंत्रालय ने सीमा सुरक्षा बल को आदेश जारी किये थे, तो वहीं 1 लाख निर्दोश पशु अरब क्यों भेजे जा रहे हैं, इसे बंद किया जाएं।
प्रतिष्ठाचार्य पुष्पेन्द्र शास्त्री ने पण्डाल में उपस्थित समस्त महिला-पुरूष एवं बच्चों को जीव दया की शपथ ग्रहण करायी। यह विरोध प्रदर्शन दो घंटे तक अनवरत रूप से चला। विरोध प्रकट करने वालों में राजीव जैन, मनोज जैन, विकास जैन, नितिन जैन, महेन्द्र जैन, धर्मेन्द्र कुमार जैन, शुभम जैन, महेश चन्द्र जैन, चक्रेश जैन, चन्द्रप्रकाश जैन, शैलेष जैन, अनुज जैन, शांतकुमार जैन, नीरज जैन, मन्नू जैन, रोहित जैन, नरेन्द्र जैन सहित सैकड़ों महिला पुरूष शामिल रहे। संचालन प्रतिष्ठाचार्य पुष्पेन्द्र शास्त्री ने किया।