इटावा में भाजपा की नई जिला कार्यकारिणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जितेंद्र गौड़ की नियुक्ति पर कार्यकर्ता नाराज हैं, उन पर पुराने विवादित ऑडियो का आरोप है।
Etawah BJP Controversy: उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में भाजपा के अंदर बड़ा सियासी विवाद छिड़ गया है। पार्टी की नई जिला कार्यकारिणी के गठन के बाद पदों की नियुक्तियों पर काफी विरोध हो रहा है। इससे संगठन में हलचल मच गई है। मुख्य विवाद जितेंद्र गौड़ की जिला महामंत्री पद पर नियुक्ति को लेकर है।
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जितेंद्र गौड़ ने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां के बारे में अभद्र टिप्पणी की थी। उनका एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें ऐसी बातें कही गई थीं। अब उसी व्यक्ति को पार्टी में इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिलने से कार्यकर्ता बहुत नाराज हैं। उनका कहना है कि इससे पार्टी की छवि खराब होती है और गलत संदेश जाता है।
पूर्व विधायक अशोक दुबे के बेटे अंशुल दुबे ने इस फैसले के विरोध में भाजपा से इस्तीफा दे दिया है। अंशुल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उनके साथ 300 से ज्यादा सक्रिय कार्यकर्ता भी इस फैसले के खिलाफ हैं। अंशुल का आरोप है कि जिला कार्यकारिणी में गलत लोगों को जगह मिल गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की मां पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले को महामंत्री बनाया गया है, जो पूरी तरह गलत है। अंशुल ने आगे कहा कि जहां विपक्ष के नेता प्रधानमंत्री पर टिप्पणी करने के लिए जेल जाते हैं, वहीं यहां पार्टी में ऐसे व्यक्ति को महत्वपूर्ण पद दिया जा रहा है। गुस्साए कार्यकर्ता प्रदेश नेतृत्व से शिकायत करने के लिए लखनऊ जा रहे हैं। उनका कहना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में इससे नुकसान होगा।
भाजपा कार्यकर्ता रिंकू त्रिपाठी ने भी आरोप लगाया कि जितेंद्र गौड़ ने जमीनों पर अवैध कब्जे किए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी अपनी जमीन भी प्रभावित हुई थी और इसकी शिकायत पहले संगठन को दी गई थी। ऐसे व्यक्ति को जिम्मेदारी मिलने से भ्रष्टाचार बढ़ेगा। रिंकू ने कहा कि वे अब पार्टी के साथ पूरी तरह काम नहीं करेंगे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जितेंद्र गौड़ से इस बारे में कहा कि जब भी पार्टी कोई जिम्मेदारी देती है, तब ऐसे आरोप लगने शुरू हो जाते हैं। ऑडियो 10 साल पुराना है और वायरल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने साइबर थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई है। जांच से सच सामने आएगा। जितेंद्र गौड़ ने कहा कि वे दूसरे जिले से हैं, इसलिए यहां उन्हें बदनाम करने की कोशिश हो रही है। पहले वे अभाविप के पदाधिकारी रहे, फिर मीडिया प्रभारी, जिला मंत्री और अब महामंत्री बने हैं। उनका दावा है कि वायरल ऑडियो किसी सपा कार्यकर्ता का है और इसकी सच्चाई अदालत तय करेगी।
यह पूरा मामला भाजपा के इटावा जिले में चल रही अंदरूनी खींचतान को सामने लाया है। नए चेहरों को जिम्मेदारी मिलने से पुराने कार्यकर्ता नाराज हैं। पदों के बंटवारे में आपसी आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। कार्यकर्ता खेमों में बंट गए हैं। अब देखना यह है कि भाजपा का प्रदेश नेतृत्व इस विवाद को कैसे संभालेगा। क्या जितेंद्र गौड़ की नियुक्ति पर कोई बदलाव होगा या शिकायतों को दबाया जाएगा? अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन में असंतोष और बढ़ सकता है। इससे आने वाले चुनावों पर भी असर पड़ सकता है।