राफेल समझौते पर जारी विवाद के बीच फ्रांस की मीडिया ने भी सवाल उठाए हैं।
पेरिसः एक ओर जहां देश में कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियां राफेल सौदे पर सवाल उठा रही हैं वहीं अब इस मामले को लेकर फ्रांस की मीडिया में भी खबरें चल रही हैं। फ्रांस के एक प्रमुख अखबार ने कांग्रेस को एक और हथियार दे दिया है। अखबार ने सवाल उठाते हुए लिखा है कि हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की जगह अंबानी की कंपनी को कैसे यह डील दे दी गई। अखबार का कहना है साल 2007 में शुरू हुई डील से हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड को 2015 में कैसे बाहर कर दिया गया और निजी क्षेत्र की कंपनी रिलायंस डिफेंस को इस समझौते में कैसे शामिल किया गया।
यूपीए सरकार ने की थी डील
फ्रांस के अखबार के अनुसार, कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने 2012 में समझौता किया था जिसके मुताबिक, सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड इस समझौते में शामिल थी जबकि सत्ता परिवर्तन के बाद इस कंपनी को बाहर कर निजी क्षेत्र की कंपनी रिलायंस डिफेंस को यह डील दे दी गई। बता दें कि साल 2012 के इस समझौते के अनुसार, फ्रांस से 18 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद होनी थी। जबकि बाकी 108 लड़ाकू विमानों को सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड फ्रांस की कंपनी असेंब्ली दसॉल्ट मिलकर बनाती।
अंबानी की कंपनी और ओलांद की प्रेमिका के बीच हुई थी डील
उधर, भारत के एक बड़े अंग्रेजी अखबार ने भी दावा किया है कि 24 जनवरी 2016 को अनिल अंबानी के रिलायंस एंटरटेनमेंट और फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ओलांद की प्रेमिका जूली गेयेट के बीच फिल्म बनाने को लेकर एक समझौता हुआ था। इस समझौते के दो दिन बाद ओलांद भारत आए थे। अखबार ने आगे लिखा है कि 2016 में इस डील के आठ सप्ताह बाद राफेल एयरक्राफ्ट बनाने वाली कंपनी डसॉल्ट एविएशन के चेयरमैन और अंबानी ने मिलकर Dassault Reliance Aerospace Ltd (DRAL) की मैनुफैक्चरिंग फैसिलिटी का नागपुर में शिलान्यास किया था। इस कार्यक्रम में फ्रांस के रक्षा मंत्री और महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस समेत केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद थे। कुल मिलाकर राफेल समझौते पर इस अखबार ने भी सवाल उठाया है।