
cg patrika news. सरकार छत्तीसगढ़ में शिक्षा और पोषण को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन बालोद जिले की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। जिले के 1531 आंगनबाड़ी केंद्रों में से लगभग 172 केंद्र जर्जर हो चुके हैं। इन केंद्रों की छतें टपकती हैं, दीवारों से प्लास्टर उखड़ रहा है और फर्श बैठ चुका है। ऐसे में 3 से 6 साल के मासूम बच्चे खतरे के साये में पढऩे को मजबूर हैं। चिंताजनक बात यह है कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के शासकीय बंगले चकाचक और सुविधाओं से लैस हैं, लेकिन जिन आंगनबाडिय़ों में देश का भविष्य तैयार होता है, उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
सबसे बड़ी तस्वीर जिले के गोटूलमुड़ा देखने को मिली। यहां आंगनबाड़ी केंद्र खुद के भवन में नहीं बल्कि एक झोपड़ीनुमा कच्चे घर में संचालित है। बरसात में झोपड़ी में पानी भर जाता है, जिससे बच्चों को बैठने में भी दिक्कत होती है। पूरक पोषण आहार और बच्चों के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की भी व्यवस्था नहीं है।
जिले में कुल 1531 में से 147 केंद्र किराए के भवन में चल रहे हैं। 60 केंद्र दूसरे शासकीय भवन के एक कमरे में संचालित हो रहे हैं और 109 केंद्र सामुदायिक भवनों और कला मंचों में चल रहे हैं। कला मंचों में अक्सर गांव के कार्यक्रम होते रहते हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई और पोषण आहार वितरण में लगातार बाधा आती है। जब कोई भवन पूरी तरह अनुपयोगी हो जाता है, तो उसे आनन-फानन में किराए के भवन या कला मंच में शिफ्ट कर दिया जाता है। नया भवन बनने में सालों लग जाते हैं।
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पूरे जिले में सबसे ज्यादा खराब स्थिति डौंडी ब्लॉक की है। यह ब्लॉक पहले से ही नक्सल प्रभावित रहा है। यहां के कई गांवों में सड़क जैसी सुविधाएं भी ठीक से नहीं पहुंच पाई हैं। ऐसे में आंगनबाड़ी भवनों की स्थिति और भी दयनीय है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं होती। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी मजबूरी में इन जर्जर भवनों में काम करने को मजबूर हैं।
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शासन ने जिले में 122 नए आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण की स्वीकृति दी थी। इसमें से 70 आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण पूरा हो चुका है और बच्चों ने नए भवनों में जाना शुरू कर दिया है। 51 भवनों में निर्माण कार्य तेजी से जारी है। विभाग का दावा है कि अगले 3 से 4 महीनों में निर्माण पूरा हो जाएगा। केवल एक जगह पर किसी तकनीकी कारण से निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। नए भवनों में शौचालय, रसोई, और खेलने के लिए पर्याप्त जगह की व्यवस्था है।
महिला एवं बाल विकास विभाग बालोद के जिला कार्यक्रम अधिकारी अनिल सिन्हा ने बताया कि जिले में जर्जर आंगनबाड़ी केंद्रों की जानकारी शासन को भेज दी गई है। नए भवन निर्माण के लिए लगातार प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं। पूर्व में 122 केंद्रों के लिए नए भवन की स्वीकृति हुई थी, जिसमें से 70 केंद्र पूर्ण हो चुके हैं और 51 जगहों पर निर्माणाधीन है।