
छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 25 साल बाद बस्तर अंचल की तस्वीर बदलती नजर आ रही है। कभी घने जंगलों, नक्सलवाद, दुर्गम रास्तों और बुनियादी सुविधाओं की कमी के लिए पहचाने जाने वाले इस इलाके में अब विकास की नई इबारत लिखी जा रही है। जिन क्षेत्रों में कभी बंदूक की गोलियों की आवाज सुनाई देती थी, वहां अब रेल की सीटी गूंज रही है। दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना इस बदलाव का प्रमुख उदाहरण बनकर सामने आई है। रावघाट से रायपुर तक रेल कनेक्टिविटी मिलने से बस्तरवासियों को राजधानी तक पहुंचने का नया विकल्प मिला है।
दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना के तहत करीब 95 किलोमीटर रेल लाइन बिछाने का काम पूरा हो चुका है और इस मार्ग पर रेल संचालन शुरू हो गया है। इसका सबसे बड़ा लाभ भिलाई स्टील प्लांट को मिल रहा है। रावघाट की खदानों से उच्च गुणवत्ता वाला लौह अयस्क रेल मार्ग से दल्लीराजहरा होते हुए भिलाई पहुंच रहा है। पहले सड़क मार्ग से अयस्क परिवहन में अधिक समय और लागत लगती थी। रेल सुविधा मिलने से कम लागत में अधिक मात्रा में लौह अयस्क की आपूर्ति संभव हो रही है। इससे औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिल रही है।
दल्लीाजहरा-रावघाट रेल लाइन के दुर्ग-रायपुर नेटवर्क से जुडऩे के बाद बस्तर अंचल के लोगों के लिए राजधानी तक पहुंचना आसान हुआ है। पहले सड़क मार्ग से रायपुर पहुंचने में 8 से 10 घंटे तक लग जाते थे। रेल सुविधा से यात्रियों के समय और खर्च में कमी आने की उम्मीद है। विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, मरीजों को बेहतर इलाज और व्यापारियों को कारोबार के लिए राजधानी तक पहुंचने में सुविधा मिल रही है। किसानों के लिए भी अपनी उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने के नए रास्ते खुल रहे हैं।
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परियोजना का अगला महत्वपूर्ण चरण रावघाट से जगदलपुर तक लगभग 140 किलोमीटर रेल लाइन बिछाना है। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से 500 करोड़ रुपए की सैद्धांतिक सहमति मिलने की बात कही गई है। यह विस्तार पूरा होने पर जगदलपुर सीधे दुर्ग-रायपुर-भिलाई के रेल नेटवर्क से जुड़ सकेगा। इससे बस्तर के दूरस्थ इलाकों में आवागमन, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावनाएं हैं।
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छत्तीसगढ़ को महाराष्ट्र से जोडऩे के लिए भानुप्रतापपुर से गढ़चिरौली तक रेल लाइन का प्रस्ताव भी केंद्रीय बजट में शामिल किया गया है। इस परियोजना पर लगभग 367 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इसके बनने से कांकेर और उत्तर बस्तर के लोगों को महाराष्ट्र आने-जाने के लिए रेल सुविधा का एक और विकल्प मिलेगा।
1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ गठन के समय बस्तर के कई इलाकों में सड़क, रेल और अन्य बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। आज रेल कनेक्टिविटी के विस्तार से क्षेत्र में आर्थिक और सामाजिक बदलाव की संभावनाएं बढ़ी हैं। रेल लाइन के साथ रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। राज्योत्सव के अवसर पर दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना बस्तर को मुख्यधारा से जोडऩे की दिशा में जारी विकास यात्रा की अहम तस्वीर पेश कर रही है।