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नागौर के सदर बाजार की साख बरकरार, ग्राहकों को आज भी यहीं मिलता भरोसे का कारोबार

नए शोरूम और ऑनलाइन खरीदारी से कारोबार प्रभावित, फिर भी पुराने ग्राहकों का भरोसा बरकरार, पार्किंग का अभाव, चालान का डर और शौचालयों की कमी बनी परेशानी; शादी-विवाह के सीजन में सदर बाजार में बढ़ती है ग्राहकों की भीड़
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नागौर

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Shyam Lal Choudhary

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Updated: 31 Oct 2026, 12:36 PM IST

नागौर का सदर बाजार

नागौर का सदर बाजार

नागौर. शहर के बाहरी हिस्सों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक खुले नए शोरूम और दुकानों के बावजूद सदर बाजार में खरीदारों की रौनक आज भी बरकरार है। वर्षों से व्यापारियों ने ग्राहकों के बीच जो भरोसा कायम किया है, वही इस बाजार की सबसे बड़ी ताकत है। शादी-विवाह और सामाजिक समारोहों के लिए एक साथ बड़ी मात्रा में कपड़ों की खरीदारी करनी हो या पसंद के मुताबिक वैरायटी तलाशनी हो, ग्राहक आज भी सदर बाजार का रुख करते हैं। त्योहारी सीजन में यहां ग्राहकों की भीड़ और बढ़ जाती है। हालांकि, ऑनलाइन खरीदारी, पार्किंग का अभाव और चालान की परेशानी कारोबार के सामने नई चुनौतियां बनकर उभरी हैं। राजस्थान पत्रिका की टीम ने शुक्रवार को सदर बाजार के कपड़ा व्यापारियों से बातचीत कर बाजार की ताकत और समस्याओं को जाना।

ग्राहकों का विश्वास आज भी कायम

बेडशीट और हैंडलूम के व्यापारी सुरेश कुमार बताते हैं कि शहर के बाहरी हिस्सों में नई दुकानें खुलने से ग्राहकी पर असर पड़ा है, लेकिन पुराने ग्राहकों का भरोसा आज भी कायम है। छोटी-मोटी खरीदारी लोग स्थानीय स्तर पर कर लेते हैं, लेकिन शादी-विवाह या सामाजिक समारोह के लिए बड़ी मात्रा में कपड़ा खरीदना हो तो सदर बाजार ही उनकी पहली पसंद रहता है।

वैरायटी और भरोसा बाजार की ताकत

कपड़ा व्यापारी विकास अरिहंत का कहना है कि ऑनलाइन खरीदारी बढऩे से बाजार प्रभावित हुआ है। अब महिलाएं भी ऑनलाइन कपड़े मंगवाने लगी हैं। कई ग्राहक ऑनलाइन कपड़ों की तस्वीरें देखकर दुकान पर आते हैं और उसी तरह के कपड़े तलाशते हैं। इसके बावजूद सदर बाजार में मिलने वाली वैरायटी और पुराने ग्राहकों का विश्वास कारोबार को मजबूती दे रहा है। यहां महिलाओं की पोशाकों से लेकर अन्य कपड़े अलग-अलग रेंज में उपलब्ध हैं। व्यापारियों ने समय के साथ अपनी दुकानों को भी अपडेट किया है। अरिहंत के अनुसार, बाजार में भीड़ और संकरे रास्तों के कारण ग्राहकों को परेशानी होती है। यातायात पुलिस वाहनों को गांधी चौक में पार्किंग करवा दे तो बाजार में खरीदारी के लिए आने वाले लोगों को काफी राहत मिल सकती है।

बदलते दौर के साथ बदला कारोबार

रेडिमेड कपड़ों के व्यापारी दिलफराज खान बताते हैं कि पहले त्योहारों पर खरीदारी का ज्यादा जोर रहता था, लेकिन अब सावों के दौरान कारोबार अधिक होता है। ग्राहकों की पसंद और बदलते समय को देखते हुए उन्होंने अपनी दुकान को अपडेट करते हुए तीन मंजिला बनाया है। उनका कहना है कि शहर के बाहरी इलाकों में दुकानें और शोरूम खुलने से सदर बाजार की ग्राहकी प्रभावित हुई है। इसके बावजूद यहां कपड़ों की बड़ी रेंज और एक ही जगह कई तरह की खरीदारी की सुविधा ग्राहकों को आकर्षित करती है। दूसरी ओर, पार्किंग की सुविधा नहीं होने और चालान कटने की आशंका के चलते कई ग्राहक भीतरी बाजारों में आने से कतराते हैं।

चार दशक पुराना रिश्ता, भरोसे से चल रहा कारोबार

कपड़ा व्यापारी राजेश कुमार चोरडिय़ा बताते हैं कि वे पिछले 40 वर्षों से कपड़े का कारोबार कर रहे हैं। उनसे पहले उनके बुजुर्ग भी इसी व्यवसाय से जुड़े थे। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के ग्राहकों का भरोसा आज भी सदर बाजार की सबसे बड़ी पूंजी है। गांवों से आने वाले खरीदारों को विश्वास रहता है कि यहां उचित दाम पर अच्छा माल मिलेगा। चोरडिय़ा के अनुसार, यदि किसी ग्राहक को खरीदे गए कपड़े में कोई खराबी मिलती है तो बाजार के व्यापारी उसे बदलने में भी सहयोग करते हैं। ग्राहकों के साथ वर्षों से बने अपनत्व के रिश्ते बाजार को मजबूती देते हैं। हालांकि, पार्किंग के अभाव के साथ सार्वजनिक शौचालयों की कमी भी बड़ी समस्या है। विशेषकर महिलाओं को इससे परेशानी होती है। उन्होंने खाई की गली में बने शौचालय की नियमित सफाई करवाने की जरूरत भी बताई।

सुविधाएं बढ़ें तो बाजार को मिले नई रफ्तार

सदर बाजार की पहचान केवल दुकानों और कपड़ों की वैरायटी तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां वर्षों से बने व्यापारी-ग्राहक के रिश्ते भी इसकी ताकत हैं। बदलते दौर में ऑनलाइन खरीदारी और नए शोरूम से प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, लेकिन भरोसे की यह पूंजी अब भी बाजार को संभाले हुए है। व्यापारियों का मानना है कि पार्किंग, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं में सुधार किया जाए तो सदर बाजार की रौनक और कारोबार दोनों को नई गति मिल सकती है।