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69 हजार पंजीकृत बेरोजगार, तीन साल में सिर्फ 513 को मिला रोजगार

बालोद जिला रोजगार कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार 69 हजार शिक्षित बेरोजगारों का पंजीयन है। पिछले तीन वर्षों में जिले में 23 रोजगार मेले आयोजित किए गए, जिनमें 513 युवाओं का चयन हुआ।
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बालोद

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Chandra Kishor Deshmukh

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Updated: 23 Oct 2026, 11:40 PM IST

बालोद जिला रोजगार कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार 69 हजार शिक्षित बेरोजगारों का पंजीयन है। पिछले तीन वर्षों में जिले में 23 रोजगार मेले आयोजित किए गए, जिनमें 513 युवाओं का चयन हुआ।

बालोद जिले में 69 हजार शिक्षित बेरोजगारों का पंजीयन रोजगार के सीमित अवसरों की तस्वीर बयां कर रहा है। जिला रोजगार कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार तीन वर्षों में जिले में 23 रोजगार मेले आयोजित किए गए, जिनमें 513 युवाओं का चयन हुआ। बड़ी संख्या में युवा अब भी रोजगार की तलाश में हैं। स्थिति यह है कि जिला रोजगार कार्यालय द्वारा रोजगार मेला और प्लेसमेंट कैंप के नाम पर महज औपचारिकता निभाई जा रही है।

रोजगार मेलों के आंकड़े

रोजगार मेलों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2023 में पांच मेलों में 127, वर्ष 2024 में आठ मेलों में 150, वर्ष 2025 में पांच मेलों में 147 और अक्टूबर 2026 तक पांच मेलों में 89 युवाओं का चयन हुआ। इस तरह कुल 23 मेलों में 513 युवाओं को चयनित किया गया।

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नौकरी में टिके रहना चुनौती

चयनित होने के बाद भी नौकरी में टिके रहना कई युवाओं के लिए चुनौती है। युवाओं के अनुसार निजी कंपनियां सेल्समैन, सुरक्षा गार्ड, हेल्पर और टेली कॉलर जैसे पदों पर आठ से दस हजार रुपए मासिक वेतन देती हैं। कम वेतन और अस्थायी रोजगार के कारण कई युवा नौकरी छोड़ देते हैं।

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भत्ते की बंदी से बढ़ी परेशानी

पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में शिक्षित बेरोजगारों को प्रतिमाह 2500 रुपए बेरोजगारी भत्ता दिया जाता था। इससे युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, आवेदन शुल्क और आने-जाने के खर्च में मदद मिलती थी। योजना बंद होने के बाद आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं की मुश्किलें बढ़ी हैं। कुछ युवा कोचिंग का खर्च नहीं उठा पाने के कारण मजदूरी करने को मजबूर हैं।

स्थानीय उद्योगों की कमी से पलायन

जिले में बड़े उद्योगों और रोजगार के पर्याप्त अवसरों की कमी के कारण युवाओं को नौकरी के लिए रायपुर, दुर्ग और अन्य शहरों का रुख करना पड़ता है। वहीं बाहर जाने में असमर्थ युवाओं के सामने रोजगार का संकट बना हुआ है।

सूचना नहीं मिलने की भी शिकायत

रोजगार कार्यालय का कहना है कि प्लेसमेंट कैंप में निजी कंपनियां भर्ती के लिए आती हैं, लेकिन सरकारी नौकरी की प्रतीक्षा कर रहे युवा इनमें अपेक्षित रुचि नहीं दिखाते। कम वेतन और बाहरी कंपनियों में काम करने की अनिच्छा भी इसकी वजह है। दूसरी ओर पंजीकृत बेरोजगारों का आरोप है कि उन्हें कैंप की तारीख, संबंधित कंपनी और रिक्त पदों की जानकारी समय पर नहीं मिलती।

नियमित रोजगार मेला आयोजित करने की मांग

युवा नितेश कुमार और रविन्द्र नेताम ने जिले में नियमित रोजगार मेले आयोजित करने, बड़ी कंपनियों को बुलाने, स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने, बेरोजगारी भत्ता फिर शुरू करने और कौशल विकास के लिए बेहतर प्रशिक्षण की मांग की है, जिससे युवा स्वरोजगार की ओर बढ़ सकें।

युवाओं को कौशल क्षमता बढ़ाने की जरूरत

जिला रोजगार अधिकारी वीके केडिया ने कहा कि समय-समय पर रोजगार मेले आयोजित किए जा रहे हैं और कंपनियों को आमंत्रित किया जाता है। युवाओं को भी अपनी कौशल क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। आने वाले समय में अधिक रोजगार मेले आयोजित करने का प्रयास किया जाएगा।