Faridabad hospital negligence: फरीदाबाद के सेक्टर-3 स्थित सरकारी अस्पताल के बाहर स्वास्थ्य व्यवस्था की लापहरवाही का एक और बड़ा मामला सामने आया है। अस्पताल के कर्मचारियों की लापरवाही के चलते गेट बंद होने के कारण एक गर्भवती महिला को आधी रात को सड़क पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा।
Hospital gate delivery: हरियाणा के फरीदाबाद से एक ऐसी घटना सामने आई है जो हमारे सरकारी स्वास्थ्य सिस्टम के दावों की पोल खोलती है। सेक्टर-3 के एक सरकारी अस्पताल में आधी रात को ड्यूटी पर तैनात स्टाफ की भारी लापरवाही के कारण एक गर्भवती महिला को अस्पताल के बंद गेट के सामने सड़क पर ही डिलीवरी करने के लिए मजबूर होना पड़ा। जब महिला प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी, तब अस्पताल का चतुर्थ श्रेणी स्टाफ अंदर चैन की नींद सो रहा था। इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना बडोली गांव के रहने वाले देवेंद्र और उनकी पत्नी बलेश से जुड़ी है। देर रात करीब 2:00 बजे बलेश को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई। देवेंद्र आनन-फानन में अपनी पत्नी को लेकर सेक्टर-3 के सरकारी अस्पताल पहुंचे। वहां पहुंचने पर उन्होंने देखा कि अस्पताल का मेन गेट पूरी तरह बंद था। देवेंद्र और उनके परिजनों ने गेट को काफी देर तक खटखटाया, आवाजें दीं और मदद की गुहार लगाई, लेकिन अंदर सो रहे कर्मचारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।
एक तरफ बलेश दर्द के मारे सड़क पर ही चीख-पुल्ला रही थी, तो दूसरी तरफ अस्पताल का कोई स्टाफ गेट खोलने को तैयार नहीं था। स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि असहनीय दर्द के कारण बलेश को सड़क पर ही लेटना पड़ा और वहीं उसकी डिलीवरी हो गई। बलेश ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया। इस पूरी घटना के करीब 20 मिनट बीत जाने के बाद अस्पताल की एक नर्स बाहर आई और आनन-फानन में जच्चा-बच्चा को अस्पताल के अंदर ले जाया गया।
इस घटना से गुस्साए परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि रात होते ही अस्पताल के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और सुरक्षा गार्ड अपनी जिम्मेदारी भूलकर सो जाते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए परिजनों ने तुरंत डायल 112 पर पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने परिजनों के बयान दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
गनीमत यह रही कि इस घोर लापरवाही के बावजूद मां और नवजात बच्चा, दोनों पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं। बताया जा रहा है कि बलेश को पांच बेटियों के बाद यह बेटा हुआ है। बहरहाल, इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कागजों पर दुरुस्त दिखने वाली स्वास्थ्य सेवाएं जमीन पर कितनी खोखली हैं।