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वेतन वृद्धि लागू न होने पर भड़के 7,500 श्रमिक, नोएडा के बाद पलवल में हाईवे जाम, फरीदाबाद में भी भारी विरोध

Minimum Wage Protest: हरियाणा के पलवल और फरीदाबाद में न्यूनतम वेतन वृद्धि को लेकर 7,500 श्रमिकों का प्रदर्शन। पलवल में दिल्ली-आगरा हाईवे जाम, प्रशासन ने 1 अप्रैल से 35% बढ़ी हुई सैलरी देने का दिया भरोसा।

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IANS Photo for representation

Employee Protests: नोएडा में हुए हिंसा के बाद हरियाणा सरकार द्वारा न्यूनतम वेतन में की गई बढ़ोतरी को जमीन पर लागू न होते देख सोमवार को श्रमिकों का गुस्सा फूट पड़ा। पलवल और फरीदाबाद के औद्योगिक क्षेत्रों में हजारों मजदूरों ने काम बंद कर सड़कों पर प्रदर्शन किया। श्रमिकों का कहना है कि सरकार की घोषणा के बावजूद कंपनियां इस संबंध में कोई सर्कुलर जारी नहीं कर रही हैं, जिससे उनमें भारी असंतोष है।

पलवल के पृथला में स्थिति उस वक्त तनावपूर्ण हो गई जब लगभग 3,200 श्रमिकों ने आगरा-दिल्ली हाईवे को पूरी तरह जाम कर दिया। करीब दो घंटे तक चले इस चक्काजाम के कारण हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बाद में पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारी श्रमिकों को हाईवे से हटाया और यातायात सुचारू कराया।

फरीदाबाद में प्रशासन ने दिया आश्वासन

वहीं, फरीदाबाद में भी भारी संख्या में श्रमिक सड़कों पर उतरे। यहां श्रम विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों के बीच जाकर उन्हें शांत कराया। अधिकारियों ने श्रमिकों को भरोसा दिलाया कि उन्हें 1 अप्रैल से बढ़ा हुआ वेतन निश्चित रूप से मिलेगा। फरीदाबाद के उपायुक्त आयुष सिन्हा ने बताया कि सभी उद्योगों को निर्देश दिए गए हैं कि वे श्रमिकों को सरकार की अधिसूचना के बारे में स्पष्ट रूप से सूचित करें ताकि किसी भी प्रकार का भ्रम न रहे।

क्या है विवाद की मुख्य वजह?

सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU) के हरियाणा महासचिव जय भगवान ने कहा कि फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा कोई आधिकारिक नोटिस जारी नहीं करने से श्रमिकों में अविश्वास का माहौल पैदा हो गया है। दरअसल, हरियाणा सरकार ने गुरुवार को सभी श्रेणियों के लिए वेतन में 35% की बढ़ोतरी अधिसूचित की थी, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी है। इससे पहले मानेसर (IMT Manesar) में भी नए श्रम कानूनों के तहत मुआवजे की मांग को लेकर इसी तरह के विरोध प्रदर्शन देखे गए थे।

प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि यह विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से कंपनी प्रबंधन और श्रमिकों के बीच संवाद की कमी और फैल रही अफवाहों के कारण हुआ है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन औद्योगिक क्षेत्रों में पुलिस और प्रशासन लगातार निगरानी रख रहे हैं।