
फर्रुखाबाद. देश व प्रदेश में भाजपा की सरकार गांव-गांव शहर-शहर करोड़ों रुपया खर्च सिर्फ इसलिये कर रही है ताकि कोई भी महिला पुरुष को खुले में शौच न जाना पड़े। बीमारियों के प्रकोप से बचा जा सके, लेकिन फर्रुखाबाद जिले में लगभग 120 र्इंट भट्टा चल रहे हैं। सभी भ_ा मालिको को बिना जांच किये ही एडीएम कार्यालय से ईसी जारी कर दी गई है जबकि भट्ठ का लाइसेंस देने से पहले भ_े पर पानी, रोशनी, शौचालय की व्यवस्था करना अति आवश्यक होता है। जो काम करने के लिए दूसरे राज्य से आने वाले मजदूर आते हैं, उनका लेखा जोखा सरकारी कार्यालय को देना होता है, लेकिन भ_ा मालिक 30 मजदूरों का रजिस्ट्रेशन कराकर 300 मजदूरों से अपने-अपने भ_ों पर काम करा रहे हैं। दूसरी तरफ जो सरकारी मानक है उनको ताख में रखकर सभी नियमों की धज्जियां उठा रहे हैं। हर भ_े पर बिहार से आये सैकड़ों मजदूर अपने परिवारों सहित दिन भर ईट पाथने का काम करते हैं।
उन्होंने ईटों से ही अपने अपने छोटे घर बना लिए, लेकिन सभी खुले में शौच करने जाते हैं। रोशनी के लिए सीधे बिजली लाइन से कटिया डाल कर बिजली का प्रयोग कर रहे हैं। भ_ा मालिको की तरफ से उनकों जो सुविधा देनी चाहिए नहीं दी जा रही है। न ही उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाता है। उनके बच्चों को स्कूल भी नहीं भेजा जाता है। भ_ा का लाइसेंस किस आधार पर दे दिया जाता है। दूसरे राज्यों के मजदूर 6 माह के लिए ही भ_ों पर काम करते हैं, लेकिन किसी को उनके काम के अनुरूप कोई सुविधा नहीं है फिर भ_ा मालिक किसके दम पर अंधा कानून चला रहे हंै। जब भ_ों पर शौचालयों को लेकर जिले के आलाधिकारियों से बात करनी चाही तो उन्होंने साफ मना कर दिया क्योंकि 31 दिसम्बर 2017 को पूरा जिला ओडीएफ घोषित करना है, लेकिन अभी सभी के घरों से लेकर भ_ों तक शौचालय नहीं बन पाये हैं।
जब भ_ों पर शौचालय न बनाये जाने को लेकर जिला पंचायत राज अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि भ_ा पर शौचालय भ_ा मालिकों को ही बनबाने चाहिए थे, लेकिन वह विभाग एडीएम साहब के पास है। यदि कोई भ_ा मालिक शौचालय नहीं बनाये हुए है। उसके लिए बड़े अधिकारियों को अवगत कराया जायेगा।
आखिर क्यों भट्ठा मजदूर जाते खुले में शौच
जिला प्रसाशन के बहुत से कर्मचारी अपनी जेब भरने के चलते बिना मानक पूरे किए भट्ठ मालिकों को ईसी जारी करा देते हैं यदि जब तक भ_ा मालिक सभी मानक पूरे न कर लें तब तक उनको ईसी जारी नहीं करनी चाहिए। ऐसा होता है तो सभी मजदूरों के लिए शौचालय बन जाएंगे, लेकिन जब तक भ्रस्टाचार करने की आदत खत्म नहीं होगी तब तक उन गरीब मजदूरों को खुले में ही शौच करना पड़ेगा।