उन्होंने दूसरी बैरक में शिफ्ट किये गए कैदी को उनके समर्थकों से मिलवाया उसके बाद मामला शांत हो सका।
फर्रुखाबाद. माफिया सुभाष ठाकुर व मुन्ना बजरंगी का हत्यारा सुनील राठी जिस जिल में कैद हैं, वहां जमकर बवाल हो गया। बताया जा रहा है कि जेल में किसी ने अफवाह फैला दी कि कैदी छोटे शुक्ला जिस बैरक में बन्द है वहां उसे फाँसी पर लटका दिया गया है। यह अफवाह आग की तरह जेल में फैल गई। छोटे शुक्ला के समर्थक कैदियों ने जेल के अंदर बवाल काटना शुरू कर दिया। वही दूसरे पक्ष पर वे हमलावर हो गए। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इसमें एक सुरक्षाकर्मी भी घायल हो गया।
समर्थकों के शुक्ला से मिलाया, तब हुआ मामला शांत-
डीआईजी जेल वीपी त्रिपाठी फोर्स के साथ जेल पहुंचे। उन्होंने दूसरी बैरक में शिफ्ट किये गए कैदी छोटे शुक्ला को उनके समर्थकों से मिलवाया उसके बाद मामला शांत हो सका। सूत्रों ने बताया कि छोटे शुक्ला ने कानपुर जेल में बवाल किया था। तो उसके साथ अन्य कैदियों को भी सेंट्रल जेल में शिफ्ट कर दिया गया था, लेकिन उसकी यह हरकतें यहां भी जारी हो गई।
मुन्ना बजरंगी का हत्या सुनील राठी है इस जेल में बंद-
सेंट्रल जेल में माफिया सुभाष ठाकुर व मुन्ना बजरंगी का हत्यारा सुनील राठी भी बैरक दो व तीन में बन्द हैं। जेल की सुरक्षा को देखते हुए सुरक्षा कर्मचारियों ने जेल डीआईजी के आदेश पर छोटे शुक्ला को दूसरी बैरक में शिफ्ट कर दिया।उसी के चलते बवाल हो गया। कैदी की मौत की अफवाह पर तीन घण्टों तक बवाल चलता रहा। उधर एसपी अतुल शर्मा ने घटना की जानकारी होने पर जेल अधिकारियों से फोन पर जेल के हालातों की सुध ली। साथ ही साथ सेंट्रल जेल चौकी प्रभारी दिनेश गौतम को जेल में हुए बबाल की जानकारी करने के लिए भेजा। जेलर से बातचीत की गई तो उन्होंने बवाल से साफ इंकार कर दिया है, लेकिन इस प्रकार से सेंट्रल जेल के अंदर तीन घण्टे हुए बवाल से साफ तौर पर कहा जा सकता है कि गुट बाजी के चलते यदि जरा भी लापरवाही जेल प्रसाशन करता है, तो सेंट्रल जेल एक युद्ध स्थल बन सकता है।
बवाल करने वाले कैदियों को किया जा रहा शिफ्ट-
फिलहाल जेल में हर कैदी पर कैमरों के माध्यम से पैनी नजर रखी जा रही है। जिससे घटना होने से पहले ही उसको समाप्त कर दिया जाए। दूसरी तरफ जेल प्रसाशन इस कवायद में लग गया है कि सेंट्रल जेल में बड़े माफियायों के बन्द होने के कारण बवाल करने वाले कैदियों को दूसरी जेल में शिफ्ट किया जाए। सेंट्रल जेल में गुटबाजी आने वाले समय के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।