
Diwali 2026 Calendar: दीपोत्सव का उल्लास इस बार छह दिनों तक रहेगा। सामान्यतः पांच दिनों तक मनने वाला दीपावली पर्व इस बार तिथियों के विशेष संयोग के कारण छह दिनों में संपन्न होगा। 6 नवंबर को धनत्रयोदशी से शुरू होकर 11 नवंबर को भाई दूज के साथ पूर्ण होगा। हर दिन आस्था, परंपरा और उल्लास का अलग रंग देखने को मिलेगा।
ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन के अनुसार 8 नवंबर को स्थिर लग्न का संयोग भी बन रहा है, अमावस्या के साथ प्रदोष काल और जो लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ माना जाता है। 2025 में अमावस्या 20 अक्टूबर को दोपहर 3.44 बजे शुरू होकर 21 अक्टूबर को शाम 5.54 बजे तक रही थी। इस साल 8 नवंबर को सुबह 11.29 बजे अमावस्या शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12.31 बजे तक रहेगी। 8 नवंबर को पूरे दिन अमावस्या रहने और रात में निशीथ काल का संयोग होने से इसी दिन दीपावली मनाना उचित माना गया है।
ज्योतिषियों के अनुसार, इस बार तिथियों के समाप्ति काल में क्रमिक बदलाव के कारण पर्वों का क्रम छह दिनों तक रहेगा। धनतेरस, छोटी दीपावली और बड़ी के निर्धारण में दीपावली जैसे पर्वों प्रदोष काल और सूर्यास्त के समय तिथि की उपस्थिति महत्वपूर्ण है। वहीं गोवर्धन पूजा प्रतिपदा पर और भाई दूज अपराह्न व्यापिनी द्वितीया के आधार पर निर्धारित होती है।
दीपोत्सव का पहला दिन धनत्रयोदशी के नाम रहेगा। द्वादशी तिथि सुबह 10.31 बजे समाप्त होगी, इसके बाद त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होकर प्रदोष काल और पूरी रात्रि रहेगी। ऐसे में धनतेरस, धन्वंतरि जयंती और यमदीपदान इसी दिन होंगे। आरोग्य, समृद्धि और मंगलकामना के साथ घरों में दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे।
त्रयोदशी तिथि सुबह 10.48 बजे समाप्त होने के बाद चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होगी। प्रदोष काल में चतुर्दशी की उपस्थिति का महत्व रहेगा। इस तरह एक ही तिथि के अलग-अलग कालों के कारण पर्वों की परंपराएं दो दिनों में अपना धार्मिक स्वरूप दिखाएंगी। के चलते छोटी दीपावली और यम दीपदान का विधान इसी दिन रहेगा। वहीं रूप चतुर्दशी और नरक चतुर्दशी पर अरुणोदयकालीन स्नान रहेगा।
दीपोत्सव का सबसे प्रमुख आकर्षण बड़ी दीपावली 8 नवंबर को मनाई जाएगी। चतुर्दशी तिथि सुबह 11.28 बजे तक रहेगी, इसके बाद अमावस्या प्रारंभ होगी। शाम को सूर्यास्त के समय प्रदोष काल में अमावस्या की उपस्थिति और रात्रिकालीन संयोग के चलते इसी दिन मां महालक्ष्मी का पूजन किया जाएगा। दीपों की कतारों, शुभमुहूर्त में आराधना और सुख-समृद्धि की कामना के साथ दीपावली की रात आलोकित होगी।
अमावस्या तिथि दोपहर 12.32 बजे समाप्त होकर कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा प्रारंभ होगी। इसी दिन गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का पर्व मनाया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला का स्मरण करते हुए प्रकृति, गौवंश और अन्न के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाएगी। मंदिरों में अन्नकूट के भोग और घरों में पारंपरिक पूजा के साथ दीपोत्सव का उल्लास आगे बढ़ेगा।
कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि इस दिन भी अपराह्न काल में व्याप्त रहेगी। यही कारण है कि भाई दूज की तारीख को लेकर भ्रम की स्थिति बन रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, जब द्वितीया तिथि दो लगातार दिनों में अपराह्न काल को स्पर्श करती है, तो पर्व निर्धारण में दूसरे दिन की अपराह्न व्यापिनी द्वितीया को प्राथमिकता दी जाती है।
भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और मंगलकामना का पर्व भाई दूज 11 नवंबर को मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य इंजीनियर हिमांशु जैन के अनुसार, इस दिन द्वितीया तिथि दोपहर 1:27 बजे से 3:37 बजे तक अपराह्न काल में रहेगी। दो दिनों तक अपराह्न व्यापिनी द्वितीया होने की स्थिति में दूसरे दिन पर्व मनाने की परंपरा के अनुसार 11 नवंबर को भाई दूज मनाना उचित होगा। बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना करेंगी।