holi bhai dooj 2023: होली के बाद भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। इसे भ्रातृ द्वितीया पर्व के नाम से भी जाना जाता है। पत्रिका.कॉम के इस लेख में हम आपको बता रहे हैं इस साल 2023 में भाई दूज की तिथि, शुभ मुहूर्त के साथ ही इसका महत्व भी...
holi bhai dooj 2023: हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में होली, दीपावली, रक्षाबंधन समेत एक पर्व भाई दूज का भी माना जाता है। ये त्योहार भाई-बहन के प्यार का प्रतीक माना जाता है। हिंदू कैलेंडर के मुताबिक साल में दो बार भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। एक भाई दूज होली पर तो दूसरी दीवाली पर मनाई जाती है। इस दिन बहनें भाई की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं। उन्हें तिलक लगाकर रक्षासूत्र बांधती हैं। होली के बाद भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। इसे भ्रातृ द्वितीया पर्व के नाम से भी जाना जाता है। पत्रिका.कॉम के इस लेख में हम आपको बता रहे हैं इस साल 2023 में भाई दूज की तिथि, शुभ मुहूर्त के साथ ही इसका महत्व भी...
भाई दूज 2023 की तिथि और शुभ मुहूर्त
- द्वितीया तिथि प्रारम्भ - 8 मार्च , 2023 को 11:12 बजे
- द्वितीया तिथि समाप्त - 10 मार्च , 2023 को 12:24 बजे
यहां जानें होली भाई दूज का महत्व
वैसे तो दिवाली पर मनाई जाने वाली भाई दूज का अधिक महत्व है, लेकिन होली के अगले दिन पडऩे वाली भाई दूज का विशेष महत्व माना गया है। यह पर्व भाई-बहन को एक-दूसरे के प्रति सम्मान और प्रेम प्रकट करने का अवसर देता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के लिए सुखी, स्वस्थ और समृद्ध जीवन की कामना करती हैं। इसके साथ ही इस दिन भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं। माना जाता है कि भाई दूज के दिन जो भाई अपनी बहन के घर जाकर अपनी बहन से अपने माथे पर तिलक लगवाए और उसके हाथों से पकाया हुआ भोजन खाए तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होगी। शास्त्रों में बताया गया है कि होली के अगले दिन अगर कोई भाई अपनी बहन से तिलक लगवाता है तो, वह कई प्रकार की बीमारियों से मुक्त हो जाता है।
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भाई दूज की पौराणिक कथा
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध किया था और उसके बाद उन्होंने अपनी बहन सुभद्रा से मुलाकात की थी। सुभद्रा ने श्री कृष्ण के माथे पर तिलक लगाया और गले में माला पहनाकर उनका स्वागत किया। सुभद्रा ने उन्हें मिठाई खिलाई और फिर अपने भाई की लंबी उम्र की प्रार्थना की। इस कथा के अलावा इस दिन के पीछे यम और यमी की कहानी भी है।
यह है यम और यमी की कहानी
हिंदू पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि इस दिन भगवान यम लंबे समय के बाद अपनी बहन यमी से मिले थे। यमी अपने भाई यम से मिलकर इतनी खुश हुई थीं कि उन्होंने उनका स्वागत मालाएं पहनाकर और आरती करके किया था। साथ ही उनके माथे पर सिंदूर का तिलक लगाया था। फिर यमी ने यम के लिए एक शानदार दावत का आयोजन किया था। यम ने यह सारा दिन अपनी बहन के साथ खुशियों में बिताया था। उन्होंने घोषणा की कि जब कोई भाई इस दिन अपनी बहन से मिलने जाएगा, तो उसे लंबी उम्र और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलेगा।