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Holika Dahan: कब जलेगी होलिका, जानिए मुहूर्त, पूजा सामग्री और पूजा विधि

Holika Dahan 2024 date होलिका दहन यानी छोटी होली (holi) प्रमुख त्योहार है और यह होलाष्टक के आखिरी दिन मनाया जाता है। आपके दिमाग में यह सवाल होगा कि बुराई पर अच्छाई की जीत का यह त्योहार कब मनाया जाएगा यानी कब होलिका जलेगी और क्या सूतक काल लगेगा, होलिका दहन का शुभ मुहूर्त क्या है, यहां जानिए सारे सवालों का जवाब...

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Mar 16, 2024
होलिका दहन का मुहूर्त, पूजा सामग्री और होलिका पूजा विधि


holika dahan 2024: पंचांग के अनुसार होलिका दहन यानी फाल्गुन पूर्णिमा और होलाष्टक 2024 का आखिरी दिन 24 मार्च को है। इसे छोटी होली के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन होलिका जलाने के साथ ही लोग ढोल नगाड़ों की थाप पर फाग गाते हैं और एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाते हैं। फिर अंगले दिन धुलेंडी मनाते हैं और रंग खेलते हैं। आइये जानते हैं होलिका दहन की तिथि और समय क्या है।


पंचांग के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा की शुरुआत 24 मार्च सुबह 9.54 बजे हो रही है और यह तिथि 25 मार्च 2024 को दोपहर 12.29 बजे संपन्न हो रही है। होलिका दहन रात में ही होता है, इसलिए यह त्योहार 24 मार्च रविवार को ही पड़ेगा।


पंचांग के अनुसार 24 मार्च को शाम 6.33 बजे से 7.53 बजे तक भद्रा पूंछ में रहेगी। इससे होलिका दहन का मुहूर्त रात 11. 12 बजे से रात 12.07 बजे तक के बीच होगा। अगले दिन रंगवाली होली यानी धुलंडी मनाई जाएगी। हालांकि इस साल 25 मार्च सोमवार को साल का पहला चंद्र ग्रहण भी है। इससे होली का उल्लास थोड़ा फीका पड़ सकता है।


परंपरा के अनुसार होलिका दहन से आठ दिन पहले से गोबर के उपलों और लकड़ियों से होलिका बनाई जाने लगती हैं। इस दिन भी होलिका में उपले, लकड़ियां, गेहूं, जौ आदि डालते हैं। इसके अलावा पूजन सामग्री में रोली, कच्चा सूत, अक्षत, पुष्प, साबुत मूंग, बताशे, नारियल, उंबी, छोटे-छोटे उपलों की माला, गेहूं की बालियां और पानी से भरा पात्र रखें। इन सभी चीजों के साथ पूजा करें। होलिका दहन होने के बाद परिक्रमा करना न भूलें।


होलिका दहन के बाद लोगों को गुझिया, खोया से भरे मीठे पकौड़े, और ठंडाई आदि खिलाए-पिलाए जाते हैं।

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होलिका दहन के दिन घरों की साफ-सफाई की जाती है। इस दिन महिलाएं व्रत भी रखती हैं और होलिका दहन के बाद व्रत खोलती हैं। इस दिन विशेष व्यंजन भी तैयार करती हैं। शाम को घर के सभी सदस्यों को उबटन लगाया जाता है और इसका मैल, अवशेष होलिका में डाल दिया जाता है।


होलिका दहन पर पूजा के लिए सबसे पहले कच्चे सूत के धागे को लकड़ी के ढेर के चारों ओर तीन या सात बार बांधे, इसके बाद गंगा जल, फूल और सिंदूर छिड़कें। इसके बाद माला, रोली, अक्षत, बताशा, हल्दी, गुलाल और नारियल चढ़ाएं फिर होलिका को अग्नि समर्पित करें।

Updated on:
24 Mar 2024 07:19 pm
Published on:
16 Mar 2024 07:00 pm
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