
सनातन धर्म में यूं तो सभी दिनों का अपना महत्व है लेकिन एकादशी का दिन बहुत विशेष माना गया है। प्रत्येक माह के दोनों पक्षों में यह तिथि अलग—अलग आती है— कृष्ण पक्ष की एकादशी और शुक्ल पक्ष की एकादशी। एकादशी तिथि भगवान विष्णु की प्रिय तिथि है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर विधिवत पूजन करने से विष्णुजी प्रसन्न होते हैं.
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष एकादशी को अजा या जया एकादशी कहा जाता है। शास्त्रों में बताया है कि जो भी भक्त सच्चे मन से इस शुभ तिथि पर भगवान नारायण का पूजन व उपवास करते हैं, उनकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। इस दिन सुबह स्नान के बाद सूर्य को जल अर्पित करें और विष्णु भगवान की पूजा करें जिससे दिन शुभ होगा।
इस बार अजा या जया एकादशी पंचांग भेद के कारण दो दिन मनाई जा रही है. कुछ पंचांगों में 3 सितंबर को जया एकादशी मनाने की बात कही गई है जबकि कुछ ज्योतिषी और पंचांग 2 सितंबर को ही जया एकादशी व्रत और पूजन की बात कह रहे हैं. खास बात यह है कि 2 सितंबर को गुरुवार का दिन है. गुरुवार को एकादशी होने से इसका महत्व बढ़ गया है।
एकादशी पर स्नान आदि से निवृत होकर भगवान विष्णु का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करें। भगवान विष्णु को तुलसी भी अर्पित करें। विष्णुजी सभी भौतिक सुख प्रदान करते हैं. घर—वाहन का सुख बिना उनके आशीर्वाद के नहीं मिल सकता, इसलिए गाड़ी, बंगला चाहिए तो उनकी पूजा मनोयोग से करें.
इस दिन विष्णुसहस्नाम स्तोत्र का पाठ जरूर करें. इस पाठ में बमुश्किल 20 मिनिट लगते हैं पर विष्णुजी की प्रसन्नता के लिए यह पाठ अवश्य करना चाहिए. विष्णु सहस्नाम स्तोत्र का पाठ कर, उनकी आरती उतारकर विष्णुजी से अपनी इच्छा पूर्ण करने की प्रार्थना करें। लगातार 40 दिनों तक विष्णुसहस्नाम स्तोत्र का पाठ करने से दुख दूर होते हैं और सुख प्राप्त होने लगते हैं.