
First time fasting women religious rules: शादी के बाद पहली करवा चौथ (Karwa Chauth) मनाने की तैयारी कर रही महिलाओं के लिए राहत की खबर है। इस साल पहली बार करवा चौथ का व्रत रखने पर कोई धार्मिक रोक नहीं है। ज्योतिष मठ संस्थान के आचार्य पंडित विनोद गौतम ने के अनुसार, धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु जैसे धर्मग्रंथों में पहली बार व्रत रखने पर किसी तरह की बाधा का उल्लेख नहीं है। इस बार 29 अक्टूबर गुरुवार को करवा चौथ मनाई जाएगी। चंद्रमा के उदय का समय रात 8.24 बजे बताया गया है।
करवा चौथ पर व्रत रखने वाली महिलाओं को चंद्रोदय के निर्धारित समय के साथ मौसम का भी ध्यान रखना होगा। आचार्य के अनुसार, शुक्र उदय के कारण आकाश में बादल और बूंदाबांदी की स्थिति बन सकती है। ऐसे में कुछ शहरों में चंद्रमा दिखाई देने में देरी हो सकती है। उन्होंने बताया कि शास्त्रीय मान्यता के अनुसार, चंद्रमा क्षितिज से थोड़ा ऊपर उठकर लालिमा लिए और शीतल दिखाई दे, तब अर्घ्य देकर पूजा करनी चाहिए।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस साल करवाचौथ पर रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र के साथ शिवयोग का संयोग रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, चंद्रमा का अपनी उच्च राशि वृषभ में होना दांपत्य जीवन में प्रेम और सौहार्द का प्रतीक माना जाता है। आचार्य के मुताबिक, यह संयोग पति-पत्नी के बीच आपसी समझ और रिश्तों में मधुरता की कामना से जुड़े इस पर्व को विशेष बनाता है।
आचार्य पं. गौतम के अनुसार, शुक्र का उदय 28 अक्टूबर की सुबह हो जाएगा। इसलिए करवा चौथ पर शुक्रास्त का दोष नहीं रहेगा। इस दिन भद्रा भी नहीं है। बंगाल में इस पर्व को दशरथ चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस तरह व्रत की तैयारी कर रही महिलाएं धार्मिक भ्रांतियों से दूर रहकर श्रद्धा के साथ पर्व मना सकती हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पहली बात व्रत करने वाली महिलाओं को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम को गलत बताया।
सूर्योदय से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
सास द्वारा दी गई सरगी ग्रहण करें।
माता पार्वती, भगवान शिव और गणेश जी का स्मरण कर व्रत का संकल्प लें।
दिन भर निर्जला या फलाहार व्रत रखें।
शाम को पूजा स्थल पर माता पार्वती, शिव, गणेश की पूजा करें।
करवा चौथ की व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
दीपक जलाकर सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना करें।
चंद्रमा निकलने पर छलनी से दर्शन करें।
चंद्रदेव को जल से अर्घ्य दें।
पति के दर्शन करके व्रत खोलें