त्योहार

Lohri Folk Song: लोहड़ी पर गाया जाता है ये लोक गीत, यहां पढ़ें कथा

Lohri Folk Song: प्रेम, उत्साह और आस्था का त्योहार है। इसकी कई अनोखी परंपरा हैं। इन्हीं में से एक है लोक गीत गाने की परंपरा और इसके पीछे की क्या कहानी है।

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lohri lok geet before makar sankranti
lohri folk song: लोहड़ी लोकगीत

Lohri Tradition: लोहड़ी भारत का बड़ा त्योहार है। ये प्रायः पंजाबी सिख समुदाय के लोग मनाते हैं, हिंदू धर्म माने वाले लोग भी उत्साह से यह त्योहार मनाते हैं। यूं तो इसे सिख समुदाय के लोग मनाते हैं, लेकिन इसकी तिथि की निर्धारण का आधार हिंदू कैलेंडर ही है। यह मकर संक्रांति के एक दिन पहले मनाया जाता है और लाल लोई भी कहा जाता है।

लोहड़ी की कथा (Lohri Ki Katha)

लोहड़ी को लेकर समाज में कई परंपरा प्रचलित हैं। इन्हीं कथाओं में से एक है दुल्ला और भट्टी की कथा। यह कथा मुगलकालीन है। पंजाब के मुगल जिले में दुल्ला नाम का डकैत था, वह लूटी सामग्री से गरीबों की मदद करता था। इसलिए एक तबके में उसकी रॉबिनहुड जैसी छवि बन गई थी।

वह निडर था, गुलाम बनाए लोगों को छुड़ाकर उनका विवाह भी कराता था। एक बार उसने सुंदरी और मुंदरी नाम की दो लड़कियों को आजाद कराया और जंगल में आग जलाकर उनका विवाह कराया। दोनों ने कन्यादान भी कराया और शगुन के रूप में शक्कर दी। मान्यता है कि इसी की याद में लोहड़ी मनाते हैं। यह पर्व नव वधुओं के लिए बहुत खास होता है। पहली लोहड़ी पर बुजुर्ग उन्हें बधाई और आशीर्वाद देते हैं।

लोहड़ी का लोक गीत


सुंदर मुंदरिये हो, तेरा कौन बेचारा हो
दुल्ला भट्टी वाला हो, दुल्ले ने धी ब्याही हो
सेर शक्कर पाई हो कुड़ी दा लाल पटाका हो
कुड़ी दा सालू फाटा हो, सालू कौन समेटे हो
चाचा चूरी कुट्टी हो जमींदारा लुट्टी हो
जमींदार सुधाए हो बड़े पोले आए हो


इक पोला रह गया हो सिपाही फड़ के लै गया हो
सिपाही ने मारी ईंट भावें रो भावें पिट
सानूं दे दो लोहड़ी जीवे तेरी जोड़ी
साडे पैरां हेठ रोड़ सानूं छेती छेती तोर
साडे पैरां हेठ दही, असीं मिलना वी नई
साडे पैरां हेठ परात सानूं उत्तों पै गई रात
दे माई लोहड़ी जीवे तेरी जोड़ी।।

Lohari 2025 Date: लोहड़ी त्योहार मकर संक्रांति (Makar Sankranti) से ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है। इस साल मकर संक्रांति 2025( Makar Sankranti 2025) 14 जनवरी को मनाई जाएगी, इस तरह लोहड़ी त्योहार इस साल 13 जनवरी सोमवार को मनाया जाएगा। लोहड़ी संक्रांति का क्षण 14 जनवरी को सुबह 9.03 बजे होगी।