
बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में मनाए जाने वाले छठ महापर्व की शुरुआत 31 अक्टूबर से होने वाली है। लोक आस्था का महापर्व छठ पर विशेष रूप से सूर्य देव की पूजा होती है। इसमें शाम को डूबते सूर्य और अगले दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
छठ पूजा का महत्व
छठ में भगवान सूर्य की उपासना की जाती है। इस व्रत को करने के नियम बेहद कठिन होते हैं। इसमें व्रति 36 घंटे तक निर्जला ब्रत रखते हैं। दरअसल, छठ पूजा साल में दो बार की जाती है और भगवान सूर्य की आराधना होती है। पहला चैत्र शुक्ल षष्ठी तिथि को और दूसरा कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन भगवान सूर्य की उपासना होती है। लेकिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को छठ को मुख्य पर्व के रूप में मनाया जाता है।
चार दिनों का महापर्व
हिन्दू पंचांग के अनुसार, छठ महापर्व कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को शुरू होता है और यह सप्तमी तक चलता है। छठ व्रत का त्योहार चार दिनों का होता है। पर्व के पहले दिन यानी कि चतुर्थी के दिन नहाय खाय का नियम होता है। दूसरे दिन खरना और तीसरे दिन शाम को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और व्रत के आखिरी और चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और 36 घंटे के उपवास के बाद पारण किया जाता है।
31 अक्टूबर 2019: नहाय-खाय
01 नवंबर 2019: खरना
02 नवंबर 2019: संध्या सूर्य अर्घ्य
03 नवंबर 2019: उगते सूर्य को अर्घ्य और पारण