
शुक्रवार 21 फरवरी को महाशिवरात्रि का महापर्व हैं, इस दिन भगवान महादेव की विशेष पूजा उपासना के बाद उनकों कई तरह के पदार्थों, पकवानों का भोग भी लगाया जाता है। पूजा में लगाए भोग को अक्सर शिव भक्त सीधे ही खा लेते हैं। कहा जाता है कि शिवजी को लगाए भोग को बिना इनकी अनुमति लेकर नहीं खाना चाहिए, नहीं तो प्रसाद ग्रहण करने वालों के साथ कुछ अनर्थ भी हो सकता है। जानें महाशिवरात्रि पर शिव जी को अर्पित किए भोग को किसकी आज्ञा लेकर खाना चाहिए।
ऐसी मान्यता हैं महाशिवरात्र या फिर अन्य दिनों में होने वाली शिवपूजा में शिवजी का सोलह प्रकार के पदार्थों से विधिवत पूजन किया जाता है। शिवजी की पूजा में मुख्य रूप से उनका शुद्धजल, गाय का दुध, गंगाजल, शहद, दही, भस्म से अभिषेक किया जाता हैं, बेलपत्र, धतुरा शिव को परम प्रिय है। इनके अलावा नैवेद्य का भोग, 56 प्रकार का विशेष भोग लगाया जाता है। जिससे प्रसन्न होकर शिवजी मनाचाहा वरदान भी देते हैं।
इनकी अनुमति लेकर ही ग्रहण करें शिवजी पर चढ़े प्रसाद को
कहा जाता है कि अगर शिवजी को चढ़ाया हुआ भोग किसी ने सीधे ही खा लिया तो वह बहुत सारे कष्टों में फस जाता है। अगर शिवजी का भोग ग्रहण करना चाहते हो और कष्टों से बचना चाहते हो तो शिव की मूर्ति या शिवलिंग के पास पहले एक शालीग्राम जी की मूर्ति स्थापित करे और फिर शिवजी को भोग लगाकर शालीग्राम जी से अनुमति लेकर भोग का प्रसाद खाया जाए तो कोई दोष नहीं लगेगा और किसी तरह का समस्या भी नही होगी। इसलिए महाशिवरात्रि के दिन शिवजी के साथ भगवान शालिग्राम जी की पूजा भी करें और शिवजी को लगाए भोग उनकी अनुमति लेकर ही ग्रहण करें।
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