त्योहार

स्त्री सुख, समृद्धि और सौभाग्य के लिए इस शुक्रवार कर लें ये काम

शुक्रवारी प्रदोष 14 जून 2019
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Jun 13, 2019
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स्त्री सुख, समृद्धि और सौभाग्य के लिए इस शुक्रवार कर लें ये काम

शास्त्रों में शिव पूजा के अनेक विधान बतायें गये है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे उत्तम व पवित्र समय प्रदोष काल होता है। दिन का अंत और रात्रि के आगमन के बीच का समय ही प्रदोष काल कहलाता है। इस काल में की गई शिव पूजा का फल अनंत गुना बढ़ जाता है और इस समय की गई आराधना से साधक की हर इच्छा पूरी हो जाती है।


शुक्रवार 14 जून को मासिक प्रदोष काल है, इस दिन प्रदोष काल में शिवजी का ऐसे पूजन करने पर व्यक्ति को स्त्री सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति सरलता से हो जाती है।

प्रदोष काल में शिव करते हैं नृत्य

कहा जाता है कि प्रदोष काल में कैलाशपति भगवान शिवजी कैलाश पर्वत डमरु बजाते हुए अत्यन्त प्रसन्नचिेत होकर ब्रह्मांड को खुश करने के लिए नृत्य करते हैं। देवी देवता इस प्रदोष काल में शिव शंकर स्तुति करने के लिए कैलाश पर्वत पर आते हैं। मां सरस्वती वीणा बजाकर, इन्द्र वंशी धारणकर, ब्रह्मा ताल देकर, माता महालक्ष्मी गाना गाकर, भगवान विष्णु मृदंग बजाकर भगवान शिव की सेवा करते हैं। यक्ष, नाग, गंधर्व, सिद्ध, विद्याधर व अप्सराएं भी प्रदोष काल में भगवान शिव की स्तुति में लीन हो जाते हैं।

शिव-पार्वती की प्रसन्नता के लिए प्रदोष व्रत

प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि में सूर्यास्त के समय को ‘प्रदोष’ कहा जाता है, कहा जाता है कि इस प्रदोष काल में गई शिव पूजा और उपवास रखने से भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं। शास्त्रानुसार प्रदोष व्रत रखने से दो गायों को दान करने के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

जन्म-जन्मान्तर तक नहीं होती है दरिद्रता

दरिद्रता और ऋण के भार से दु:खी व संसार की पीड़ा से व्यथित मनुष्यों के लिए प्रदोष पूजा व व्रत पार लगाने वाली नौका के समान है। ‘प्रदोष स्तोत्र’ में कहा गया है- यदि दरिद्र व्यक्ति प्रदोष काल में भगवान गौरीशंकर की आराधना करता है तो वह धनी हो जाता है। यदि कोई राजा प्रदोष काल में शिवजी की प्रार्थना करता है तो उसे दीर्घायु की प्राप्ति होती है, वह सदैव निरोग रहता है, और राजकोष की वृद्धि व सेना की बढ़ोत्तरी होती है।

ऐसे करें प्रदोष काल में शिव पूजा

1- सूर्यास्त के 15 मिनट पहले स्नान कर धुले हुये सफेद वस्त्र पहनकर- शिवजी को शुद्ध जल से फिर पंचामृत से स्नान कराये, पुन: शुद्ध जल से स्नान कराकर, वस्त्र, यज्ञोपवीत, चंदन, अक्षत, इत्र, अबीर-गुलाल अर्पित करें। मंदार, कमल, कनेर, धतूरा, गुलाब के फूल व बेलपत्र चढ़ाएं, इसके बाद धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल व दक्षिणा चढ़ाकर आरती के बाद पुष्पांजलि समर्पित करें।

2- उत्तर दिशा की ओर मुख करके भगवान उमामहेश्वर का ध्यान कर प्रार्थना करें- हे उमानाथ- कर्ज, दुर्भाग्य, दरिद्रता, भय, रोग व समस्त पापों का नाश करने के लिए आप पार्वतीजी सहित पधारकर मेरी पूजा स्वीकार करें।

इस मंत्र से हाथ जोड़कर प्रार्थना करें

‘भवाय भवनाशाय महादेवाय धीमते।
रुद्राय नीलकण्ठाय शर्वाय शशिमौलिने।।
उग्रायोग्राघ नाशाय भीमाय भयहारिणे।
ईशानाय नमस्तुभ्यं पशूनां पतये नम:।।

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Published on:
13 Jun 2019 02:37 pm