
नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय का मानना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के मुनाफे में आए सुधार के बाद से हो सकता है कि चालू वित्त वर्ष में तीन से चार बैंक भारतीय रिजर्व बैंक की त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) निगरानी सूची से बाहर हो जाएं। भारतीय रिजर्व ने पीसीए के ढांचे में 21 सरकारी बैंकों में से 11 बैंकों को रखा है।
आरबीआई ने पीसीए में 11 सरकारी बैंकों को रखा
- इलाहाबाद बैंक
- यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया
- कॉरपोरेशन बैंक
- आईडीबीआई बैंक
- यूको बैंक
- बैंक ऑफ इंडिया
- सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
- इंडियन ओवरसीज बैंक
- ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स
- देना बैंक
- बैंक ऑफ महाराष्ट्र
केंद्रीय बैंक का बीएफएस करेगा जांच
आरबीआई ने पिछले सप्ताह अपनी केंद्रीय बोर्ड की बैठक में निर्णय लिया था कि, पीसीए के तहत बैंकों के मुद्दे की जांच केंद्रीय बैंक का वित्तीय निगरानी बोर्ड (बीएफएस) करेगा। पीसीए के तहत बैंकों को तब रखा जाता है जब तीन प्रमुख नियामकीय बिंदुओं का उल्लंघन करते हैं।
बैंकों का परिचालन लाभ 11.5 प्रतिशत बढ़ा
बैंकों ने पहली तिमाही के दौरान 36,551 करोड़ रुपए की वसूली की, जो कि पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही से 49 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि इस अवधि में बैंकों का परिचालन लाभ 11.5 प्रतिशत बढ़ा है जबकि तिमाही आधार पर घाटा 73.5 प्रतिशत कम हुआ है।