
नई दिल्ली। हर साल आम बजट के पेश होते ही लोगों की उत्सुकता टैक्स स्लैब के बारे में जानने की होती है। क्योंकि टैक्स में किए गए फेरबदल से ही जनता की पाॅकेट पर पड़ने वाले बोझ का वजन तय होता है। पिछले साल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्स धारकों को बड़ी राहत नहीं दी थी। इस वित्त वर्ष 2021-22 भी एक्सपर्ट्स कुछ वैसी ही उम्मीद कर रहे हैं। जानकारों के मुताबिक औद्योगिक क्षेत्र में कोरोना काल के दौरान की गई राहत पैकेज की घोषणाओं और आम आदमी को दी गई छूट को देखते हुए टैक्स स्लैब में बहुत ज्यादा फेरबदल की संभावना नहीं है। ऐसे में 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट से नागरिकों को राहत की कम ही उम्मीद है।
हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार वेतनभोगी और मध्यवर्गीय परिवारों को आयकर कानून की धारा80सी और 80डी के तहत थोड़ी छूट दे सकती है। ऐसे में छूट की सीमा को 1.5 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख या 3 लाख रुपए तक किया जा सकता है। कोरोना काल के खतरे को देखते हुए काफी समय से हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम की सीमा को 25,000 रुपए से बढ़ाने की मांग की जा रही है। ऐसे में इसमें मामूली बढ़ोत्तरी देखने को मिल सकती है।
वित्तीय घाटा बन सकता है रोड़ा
जानकारों के मुताबिक कोरोना काल में लाॅकडाउन के चलते अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान हुआ है। वित्तीय घाटे को देखते हुए केंद्र सरकार टैक्स में बड़े राहत पैकेज की घोषणा करने से बच सकती है। केंद्र अपनी सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी बेचने और राजस्व संग्रह के लक्ष्य से भी पीछे चल रही है। ऐसे में बड़ी राहत की संभावना ना के बराबर है।