
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश की सभी एयरलाइंस को झटका देते हुए कहा कि अगर किसी फ्लाइट में किसी फॉल्ट की वजह से कैंसल होती है तो उसका पूरा भुगतान एयरलाइंस को करना होगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि फ्लाइट कैंसल होने में पैंसेजर की कोई गलती नहीं है। ऐसे में उसका पूरा भुगतान कंपनियां ही करेगी। वहीं अगर फ्लाइट में किसी वजह से देरी होती है तो कंपनियों को उसका मुआवजा पैसेजेंर्स को देना होगा। इस बारे में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री ने जयंत सिन्हा ने इस बात की जानकारी दी। कुछ दिन पहले एयर इंडिया पर उड़ान में देरी होने से 88 लाख डॉलर का जुर्माना लगने की खबर सामने आई थी।
कई बार आ चुकी हैं कैंसल और देरी की सूचनाएं
सरकार और गैर-सरकारी एयरलाइंस कंपनियों की ओर से फ्लाइट कैंसल और देरी की कई बार घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कुछ दिन पहले दिल्ली से शिकागो जाने वाली फ्लाइट देरी से पहुंची थी। जिसकी वजह से पैसेंजर्स को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। जिस कारण से एयर इंडिया को 88 लाख डॉलर का जुर्माना भी लगाया गया था। जिसके बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस में मामले में सख्ती बरतने के मामले में विचार कर रहा था।
एनएई से हुई ये कंपनिया डी-लिस्ट
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एनएसई) ने 30 मई से दिवालिया किंगफिशर एयरलाइंस (केएफए) समेत 17 अन्य कंपनियों को डीलिस्ट कर दिया है। एनएसई की परिपत्र के मुताबिक, केएफए, एग्रो डच इंडस्ट्रीज, ब्रॉडकास्ट इनिशिएटिव्स और लुमेक्स ऑटोमोटिव सिस्टम्स के साथ अन्य कंपनियों को डीलिस्ट किया जा रहा है। शेयर बाजार ने कहा कि ब्रांडहाउस रिटेल्स, एल्डर फार्मास्यूटिकल्स, फर्स्ट लीजिंग कंपनी इंडिया, ग्लोडाइन टेक्नोसर्व, तुलिप टेलीकॉम और वरुण इंडस्ट्रीज को 'परिसमापन के कारण' (कंपनी बंद होने के कारण) डीलिस्ट किया जा रहा है।