भारत का पहली तिमाही में चालू खाता घाटा घटकर हुआ 14.3 अरब डॉलर सेवाओं के जरिए आई विदेशी मुद्रा, वित्तीय संपत्तियों आदि से हुई आय में बढ़ोतरी
नई दिल्ली। कच्चे तेल की कीमतों के कम होने के बाद भी पेट्रोल और डीजल के दाम में इजाफा करने के से हुई आय, सर्विस सेक्टर से हुई इनकम और बाकी परिसंपत्तियों से आमदनी की वजह से सरकार का 2019-20 की पहली तिमाही में चालू घाटे में कमी आई है। आरबीआई की ओर से जारी हुए यह आंकड़े पहली तिमाही हैं। उस वक्त जो स्थिति थी उसी के अनुसार यह आंकड़े हैं। वैसे उसके बाद की तिमाही में सरकार की ओर से जो घोषणाएं की हैं उससे देश की चालू घाटा बढ़ा है।
चालू घाटे में आई कमी
कच्चे तेल की कम कीमतों, सेवा जैसे अदृश्य कारोबार से अधिक आय के कारण भारत का 2019-20 की प्रथम तिमाही में चालू खाता घाटा घटकर 14.3 अरब डॉलर हो गया। भारत के बकाया भुगतान (बीओपी) पर भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़े बताते हैं कि सीएडी 2018-19 की प्रथम तिमाही में 15.8 अरब डॉलर (जीडीपी का 2.3 फीसदी) से घटा था, लेकिन इसके पहले की तिमाही में 4.6 अरब डॉलर (जीडीपी का 0.7 फीसदी) से अधिक था।
आरबीआई का बयान
आरबीआई ने एक बयान में कहा है, "सीएडी प्राथमिक रूप में 31.9 अरब डॉलर की उच्च अदृश्य आमद के कारण वर्ष दर वर्ष आधार पर घटा है, जबकि एक वर्ष पहले यह आमद 29.9 अरब डॉलर थी।" सेवाओं के जरिए आई विदेशी मुद्रा, वित्तीय संपत्तियों, श्रम व संपत्ति और करेंट ट्रासफर से आय अदृश्य आमद में गिने जाते हैं।