
नई दिल्ली। महाराष्ट्र की पुणे पुलिस ने खुलासा किया है कि माओवादी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करना चाहते हैं। इस संबंध में पुणे पुलिस ने अदालत में एक पत्र भी दाखिल किया है जिसमें पीएम मोदी को मारने की बात कही गई है। अदालत में पुलिस ने कहा है कि उन्हें यह पत्र भीमा कोरेगांव हिंसा के सिलसिले में दिल्ली से गिरफ्तार किए गए रोना जैकब विल्सन के मुनिरका स्थित फ्लैट में मिला है। अभियोजन पक्ष की वकील उज्ज्वला पवार के मुताबिक, पत्र में M-4 राइफल और हथियार खरीदने के लिए आठ करोड़ रुपए की जरूरत की बात लिखी है। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर माओवादी हिंसक घटनाओं को अंजाम देने के लिए हथियार खरीदने से लेकर अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए धन कहां से लाते हैं। हालांकि किसी भी सरकारी एजेंसी के पास माओवादियों की कमाई को लेकर पुख्ता आंकड़े नहीं हैं।
एेसे कमाई करते हैं माओवादी
देश के करीब 203 जिले माओवादियों से प्रभावित हैं। अपना वजूद बनाए रखने के लिए ये माओवादी इन जिलों में समय-समय पर हिंसा को अंजाम देते रहते हैं। हिंसा को अंजाम देने और अन्य जरूरतों को पूरी करने के लिए माओवादियों को हर साल सैकड़ों करोड़ रुपए की आवश्यकता होती है। रुपयों की इस आवश्यकता को माओवादी उगाही और वसूली के जरिए पूरी करते हैं। अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार की एक स्टडी में कहा गया है कि माओवादी उगाही और वसूली के जरिए हर साल करीब 250 करोड़ रुपए की कमाई करते हैं। स्टडी के अनुसार ये माओवादी व्यवसायियों, उद्योगों, ठेकेदारों, भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों और तेंदू पत्ते के ठेकेदारों से वसूली करते हैं।
2010 में 1500 करोड़ रुपए तक थी कमाई
खबरों के अनुसार इंटेलिजेंस ब्यूरो ने 2010 में एक रिपोर्ट में माओवादियों की कमाई सालाना करीब 1500 करोड़ रुपए होने की बात कही गई थी। हालांकि उस समय छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने इस आंकड़े को 1000 से 1200 करोड़ रुपए सालाना बताया था। लेकिन एंटी माओवादी ऑपरेशन से जुड़े कई अधिकारियों ने इन आंकड़ों को गलत बताया था। इन अधिकारियों का कहना था कि सरकारी एजेंसियों की ओर से आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए हैं। लेकिन इन अधिकारियों ने माओवादियों की कमाई 250 करोड़ रुपए सालाना के आसपास बताई थी।