पीएम मोदी चीन से रिश्तों को बेहतर करने में लगे हुए हैं। इस बात का अंदाजा तो इसी बात से लगाया जा सकता है की अपने कार्यकाल में पीएम मोदी ने अगर किसी देश का दौरा सबसे ज्यादा किया है तो वो है चीन। ऐसा माना जा रहा था की भारत और चीन के कारोबारी रिश्तो को बेहतर करने के लिए भारत सरकार ने चीन को भारत में बैंक खोलने की अनुमति दी हैं। लेकिन गृह मंत्रालय ने दिल्ली में बैंक ऑफ चाइना की शाखा खोलने के प्रस्ताव को खारीज कर दिया हैं।
नई दिल्ली। पीएम मोदी चीन से रिश्तों को बेहतर करने में लगे हुए हैं। इस बात का अंदाजा तो इसी बात से लगाया जा सकता है की अपने कार्यकाल में पीएम मोदी ने अगर किसी देश का दौरा सबसे ज्यादा किया है तो वो है चीन। ऐसा माना जा रहा था की भारत और चीन के कारोबारी रिश्तो को बेहतर करने के लिए भारत सरकार ने चीन को भारत में बैंक खोलने की अनुमति दी हैं। लेकिन गृह मंत्रालय ने दिल्ली में बैंक ऑफ चाइना की शाखा खोलने के प्रस्ताव को खारीज कर दिया हैं। इसका करण खुद चीन और उसकी चालबाजिया ही हैं। अगर बात धोखा देने और बेमानी करने की हो तो चीन उसमें सबसे आगे ही नजर आता है।
नियमों का पालन नही किया
पीएम मोदी ने जब बैंक ऑफ चाइना की शाखा को लेकर गृह मंत्रालय से राय मांगी तो उसने इस प्रस्ताव को खारीज करने को कहा। गृह मंत्रालय प्रस्ताव को खारीज इसलिए करना चाहता है क्योंकि मुंबई में जो बैंक ऑफ चाइना ( आईसीबीसी) की शाखा है उसमें चीन के 11-12 नागरिक काम कर रहे हैं। यह नियमों का खुला उल्लंघन है क्योंकि बैंक को चीन के सिर्फ तीन-चार नागरिकों को ही काम पर रखने की अनुमति है। गृह मंत्रालय का ये भी कहना है की ऐसे में जब आईसीबीसी भारत के नियमों का पालन ही नहीं करेगा तो उसे भारत की राजधानी में दूसरी शाखा खोलने की अनुमति नही दी जा सकती।
नहीं हुआ चीनी नागरिकों का पंजीकरण
विदेशी नागरिक जो की भारत में काम करने आते है उन्हें हर 6महीने मे यहां रहने के लिए पंजीकरण कार्यालय में रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। गृह मंत्रालय के मुताबिक चीन ने यहां भी नियमों का पालन नही किया हैं। चीन ने सिर्फ चार कर्मियों ने रजिस्ट्रेशन ही करा रखा है।
दुनिया का सबसे बड़ा बैंक
बता दे की बैंक ऑफ चाइना दुनिया का सबसे बड़ा बैंक है। अगर बात इसकी शाखाओ की जाए तो 42देशों में आईसीबीसी की शाखा है। इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना की स्थापना 1 जनवरी 1984 को बीजिंग में हुई थी।