— यूपी के फिरोजाबाद में देश की आजादी के लिए क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों के खिलाफ छेड़ दी थी मुहिम।
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
फिरोजाबाद। देश की आजादी के लिए लाखों करोड़ों लोगों ने अपने प्राणों को बलिदान किया। उनके बलिदान का आज पूरा देश ऋणी है। यूपी के फिरोजाबाद में भी देश की आजादी के लिए आवाज उठी थी। कई क्रांतिकारियों ने सत्याग्रह किया। जेल की यात्राएं कीं और फिर भी अंग्रेजों से हार नहीं मानी।
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सुनाई गई थी सजा
यह बात है कि 18 मार्च 1941 की। उस समय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कालीचरन गुप्ता ने अंग्रेजों के चंगुल से देश को आजाद कराने के लिए कई बार जेल यात्राएं की। वह सत्याग्रह करते जेल गए थे। आठ अप्रैल 1941 को उन्हें आठ माह की कैद व 50 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। जुर्माना अदा न देने पर चार माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ी थी। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 17 सितंबर 1942 को वह गिरफ्तार हुए। वह 1946 तक जेल में कैद रहे। उस समय उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत की नाक में दम कर दिया था।
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पूर्व प्रधानमंत्री के साथ भी रहे
सेनानी के पुत्र सुरेश चंद्र गुप्ता एडवोकेट ने बताया कि उनके पिता कालीचरन आगरा सेंट्रल जेल में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ भी रहे थे। इसके अलावा उन्होंने फतेहगढ़ जेल में कई साल बिताए थे। अंग्रेजों से देश को आजाद कराने के लिए देशभक्तों ने हिरनगांव रेलवे स्टेशन को 17 अगस्त 1942 को फूंक दिया था। इसकी वजह यह थी कि इस स्टेशन से अंग्रेजी सेना का आवागमन रहता था।
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सेना के साथ पहुंचे फिरंगी
आजादी की जंग को लेकर क्रांतिकारियों की मंत्रणा गांव गुंदाऊ में चल रही थी। तभी तानाशाह दरोगा इमदाद खां और तहसीलदार अंग्रेजी सेना के साथ इन्हें पकड़ने पहुंच गए थे। जहं अपने आपको घिरता देख क्रांतिकारियों ने वंदे मातरम की आवाज को बुलंद करते हुए अंग्रेजी सेना के हथियार डलवा दिए थे। स्वतंत्रता सेनानी भूप सिंह और मक्खनपुर के राजाबाबू ने भी अंग्रेजों ने छक्के छुड़ा दिए थे। इनके अलावा और भी ऐसे क्रांतिकारी फिरोजाबाद में हुए जिन्होंने अंग्रेजों को भगाने के लिए सत्याग्रह शुरू किया और अंग्रेजी सेना के छक्के छुड़ा दिए।