अनेक लोगों ने की पत्रिका के अभियान में सहभागिता, बेटियों ने जताई पिता के सहयोग की आस
गाडरवारा। पत्रिका के बेटी एट वर्क अभियान के तहत बेटी दिवस के उपलक्ष्य में नगर के अनेक प्रतिष्ठित व्यवसायी अपनी बेटियों को अपने प्रतिष्ठान पर लाए। जहां बेटियों की पापा की कुर्सी पर बैठकर काम की बारीकियां जानी एवं यह भी जाना कि किन प्रतिकूल परिस्थितियों में उनके पिता क ड़ी मेहनत कर रुपए कमाते हैं। नगर के हृदय स्थल झंडाचौक पर बसंत कुमार दीपक कुमार सराफ की अंबाजी ज्वेलर्स नामक प्रतिष्ठित सराफा दुकान है। जहां दुकान के संचालक दीपक सोनी अपनी 13 वर्षीय सुपुत्री राजुल को लेकर आए। यहां राजुल ने कहा कि मुझे बहुत अच्छा लगा पापा की दुकान पर आकर, यहां आकर जाना कि पापा कैसे काम करते हैं। कितनी मेहनत करते हैं, मैं बड़ी होकर अपने पापा का सहयोग करना चाहूंगी। वहीं पिता दीपक सोनी ने कहा कि पत्रिका यह अभियान बेहद सराहनीय है इससे बेटियों में आत्मविश्वास बढ़ता है, ऐसे कार्यक्रम निरंतर चलने चाहिए। वैसे भी आज बेटे बेटी में ज्यादा फर्क नहीं रह गया है। बच्चों को अपने माता पिता के काम में हाथ बंटाना चाहिए।
इसी प्रकार नगर के सराफा दुकान एवं राईस मिल संचालक अनुराग लूनावत की सुपुत्री मौली लूनावत (13) ने कहा मेरे दादा एवं पापा मेरे आदर्श हैं, जब मैं बड़ी होकर बिजनेस के बारे में सोचती हूं कि बड़े होकर उनकी सहायता कैसे कर सकूंगी तो मेरी अभिलाषा है कि उनके कंधे से कंधा मिलाकर उनकी सहायता कर आशीर्वाद प्राप्त करूं । अनुराग ने भी कहा कि उन्हे अपनी बेटी पर गर्व है एवं पत्रिका के अभियान को सराहा।
एक लड़की आज सब कुछ कर सकती है
ऐसे ही नगर की प्रतिष्ठित किराना दुकान राजेंद्र किराना के संचालक अरुण कौरव अपनी पुत्री रानू कौरव (16) को पत्रिका अभियान के तहत दुकान पर लाए। जहां रानू कौरव ने कहा बहुत गर्व होता है जब आपकी शिक्षा अपने पापा के काम आती है। मुझे ऐसा नहीं लगता कि लड़के ही व्यपाार कर सकते हैं। आज लड़कियां हर क्षेत्र में आगे आ रही हैं। एकबार किसी ने पापा से पूछा कि बेटी का रानू नाम लड़कों जैसा नहीं लगता। इस पर पापा ने कहा कि उसका नाम ही नहीं मेरी बेटी भी लड़के से कम नही है। एक लड़की सब कुछ कर सकती है। वो घर भी सम्हाल सकती है और बिजनेस भी।