गरियाबंद

20 चक्कर, 4 बैंक खाते… फिर भी नहीं मिली PM आवास की किश्त, बुजुर्ग महिला ने PMO को लिखा पत्र

PM Awas Yojana: गरियाबंद जिले में पक्का घर हर गरीब का सपना होता है और प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) इसी उद्देश्य से शुरू की गई थी।
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Updated: 19 Feb 2026, 3:57 PM IST
20 चक्कर, 4 बैंक खाते… फिर भी नहीं मिली PM आवास की किश्त, बुजुर्ग महिला ने PMO को लिखा पत्र(photo-patrika)
20 चक्कर, 4 बैंक खाते… फिर भी नहीं मिली PM आवास की किश्त, बुजुर्ग महिला ने PMO को लिखा पत्र(photo-patrika)

PM Awas Yojana: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में पक्का घर हर गरीब का सपना होता है और प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) इसी उद्देश्य से शुरू की गई थी। लेकिन जिले की उसरीपानी पंचायत की 68 वर्षीय हराबाई नायक के लिए यह सपना एक साल तक अधूरा ही रहा। मंजूरी मिलने के बावजूद उनके खाते में आवास की पहली किश्त नहीं पहुंची, जिससे वे अपने परिवार के साथ टूटी दीवारों पर तिरपाल डालकर रहने को मजबूर रहीं।

PM Awas Yojana: सालभर भटकती रहीं, नहीं मिला समाधान

जानकारी के अनुसार हराबाई को पिछले वर्ष आवास योजना की स्वीकृति मिली थी। उनका नाम सूची में दर्ज था, लेकिन राशि खाते में नहीं आई। इस दौरान उन्होंने चार अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए और करीब 20 बार जनपद कार्यालय के चक्कर लगाए। अधिकारियों ने ई-केवाईसी में तकनीकी खामी का हवाला दिया, पर समस्या का समाधान नहीं हो सका। आर्थिक तंगी के बीच परिवार की स्थिति और खराब होती गई।

आधा मकान तोड़ा, अब बरसात का डर

मंजूरी मिलने के बाद हराबाई ने बड़े बेटे के लिए जगह बनाने हेतु अपने कच्चे मकान का आधा हिस्सा तोड़ दिया था। शेष हिस्से में वे पति गोविंद नायक और छोटे बेटे के साथ तिरपाल डालकर रह रही हैं। दो बेटों की शादी हो चुकी है और वे अलग रहते हैं, जबकि छोटे बेटे का विवाह आवास न बनने के कारण अटका हुआ है। बरसात के मौसम को लेकर परिवार में चिंता बनी हुई है।

PMO को पत्र के बाद जागी उम्मीद

थक-हारकर हराबाई ने 27 जनवरी को अधिवक्ता कन्हैया मांझी की मदद से Narendra Modi के नाम पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई। मामला मीडिया में आने के बाद संबंधित अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया और जल्द समाधान का आश्वासन दिया।

दो-तीन दिनों में मिलेगी पहली किश्त

ब्लॉक समन्वयक शिव कुमार नवरंगे के अनुसार ई-केवाईसी की तकनीकी त्रुटियों को दूर कर फिंगर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। जनपद और जिला स्तर से टिकट नंबर जनरेट कर स्टेट कोऑर्डिनेटर को भेजा गया है। हराबाई का नाम अब ग्रीन लिस्ट में शामिल हो गया है और दो से तीन दिनों में पहली किश्त खाते में जमा कर दी जाएगी।

हराबाई नायक की कहानी यह दर्शाती है कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में जमीनी स्तर पर आने वाली तकनीकी और प्रशासनिक बाधाएं किस तरह गरीबों को परेशान करती हैं। साथ ही यह भी कि अपने हक के लिए आवाज उठाने पर समाधान की राह खुल सकती है।

Updated on:
19 Feb 2026, 3:57 PM IST
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