CG Canal link project: गरियाबंद और महासमुंद जिले के लिए बड़ी राहत की खबर है। ‘सिकासार-कोडार जलाशय नहर लिंक परियोजना’ को राज्य सरकार ने 3040 करोड़ रुपए की मंजूरी दे दी है।
CG Canal link project: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद और महासमुंद जिले के लिए बड़ी राहत की खबर है। ‘सिकासार-कोडार जलाशय नहर लिंक परियोजना’ को राज्य सरकार ने 3040 करोड़ रुपए की मंजूरी दे दी है। यह प्रदेश की पहली ऐसी परियोजना होगी, जिसमें एक डेम को दूसरे डेम से जोड़ा जाएगा। परियोजना को वर्ष 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, वहीं सिंचाई विभाग ने टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत सिकासार जलाशय के अतिरिक्त जल का उपयोग महासमुंद जिले के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में किया जाएगा। इससे करीब 25 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। साथ ही पेयजल और औद्योगिक उपयोग के लिए भी जल उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।
परियोजना का सीधा लाभ 178 गांवों को मिलेगा। इनमें 41,780 अनुसूचित जनजाति (ST) और 6,145 अनुसूचित जाति (SC) परिवार समेत कुल 79,650 परिवार शामिल हैं। इससे पहले सिकासार परियोजना के तहत 101 गांवों में 58 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो रही थी, लेकिन अब इसका दायरा और बढ़ेगा।
इस परियोजना की सबसे खास बात इसका तकनीकी नवाचार है। सिकासार बैराज से कोडार जलाशय तक 88 किलोमीटर लंबी भूमिगत स्टील पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इससे पानी के वाष्पीकरण और रिसाव से होने वाले नुकसान को रोका जा सकेगा। विभाग का दावा है कि इस तकनीक से 30 से 35 मिलियन घन मीटर पानी की बचत होगी।
परियोजना में आधुनिक SCADA (Supervisory Control and Data Acquisition) तकनीक का उपयोग किया जाएगा। पाइपलाइन जिन गांवों से गुजरेगी, वहां आउटलेट बनाए जाएंगे, जहां से जरूरत के अनुसार पानी की आपूर्ति स्वत: नियंत्रित होगी। पूरी प्रणाली की निगरानी कंट्रोल रूम से की जाएगी।
इस परियोजना की परिकल्पना सिंचाई विभाग के कार्यपालन अभियंता एसके बर्मन ने की थी। उन्होंने वर्ष 2022 में इस योजना का प्रस्ताव वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रखा था, जिसे तकनीकी रूप से नवाचारपूर्ण मानते हुए 2023 में सर्वे की मंजूरी दी गई। अब यह योजना राज्य की एक प्रमुख उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है।
सरकार इस परियोजना के दूसरे चरण पर भी काम कर रही है। इसके तहत सिकासार जलाशय को अमानाला और सोन नदी से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। यदि यह चरण भी पूरा होता है, तो पूरे क्षेत्र में जल प्रबंधन की स्थिति में व्यापक सुधार होगा।
यह परियोजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि भूजल स्तर बढ़ाने और पेयजल संकट को दूर करने में भी अहम भूमिका निभाएगी। बागबाहरा और झलप जैसे क्षेत्रों में जहां अब तक सिंचाई की सुविधा नहीं थी, वहां भी किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। कुल मिलाकर यह परियोजना क्षेत्रीय विकास और जल प्रबंधन के लिहाज से गेमचेंजर साबित हो सकती है।