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Ayushman Yojana: आयुष्मान योजना में गड़बड़ी, सिर में लगी चोट को निमोनिया बताकर लाखों रुपए निकाले

Ayushman Yojana: महिला का इलाज जनरल वार्ड में किया गया, लेकिन अस्पताल के रिकॉर्ड में उसे आईसीयू में भर्ती बताया गया। इसके बाद अस्पताल ने इलाज के लिए महंगे पैकेज, दवाइयां और आईसीयू की बिलिंग की।

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Ayushman Yojana: आयुष्मान योजना में गड़बड़ी, सिर में लगी चोट को निमोनिया बताकर लाखों रुपए निकाले

सड़क हादसे में महिला के सिर में लगी चोट (Photo Patria)

Ayushman Yojana: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के छुरा में उड़ीसा के नुवापाड़ा जिले की रहने वाली 56 वर्षीय महिला रामशिला मांझी के इलाज में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना की पारदर्शिता और कार्यान्वयन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

परिजनों का आरोप है कि 18 जनवरी को सडक़ दुर्घटना में सिर में गंभीर चोट लगने के बाद महिला को उड़ीसा के नुवापाड़ा जिला अस्पताल से उच्च स्तरीय उपचार के लिए रेफर किया गया। लेकिन छुरा नगर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान गड़बड़ी का खुलासा हुआ।

अस्पताल में इलाज और कागजी रिकॉर्ड में अंतर

महिला का इलाज जनरल वार्ड में किया गया, लेकिन अस्पताल के रिकॉर्ड में उसे आईसीयू में भर्ती बताया गया। इसके बाद अस्पताल ने इलाज के लिए महंगे पैकेज, दवाइयां और आईसीयू की बिलिंग की। आरोप है कि सिर की गंभीर चोट के बजाय अस्पताल ने इलाज में निमोनिया और अन्य गंभीर बीमारियों का उल्लेख कर महंगी दवाइयां दिखाई।

आर्थिक लाभ का आरोप

आयुष्मान योजना के तहत मरीज को मुफ्त इलाज मिलना चाहिए था, लेकिन परिजनों का कहना है कि उनसे 8 से 10 हजार रुपए अतिरिक्त भी लिए गए। इसके अलावा केवल 10 दिनों में 90 हजार से 1 लाख रुपये तक की राशि योजना के तहत फर्जी तरीके से निकाली गई। यह आरोप आयुष्मान योजना के पैकेज का दुरुपयोग और आर्थिक लाभ लेने का है।

आत्मसुरक्षा पर सवाल

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आईसीयू में भर्ती दिखाए गए मरीज को 50 किलोमीटर दूर राजिम-नयापारा क्षेत्र में सीटी स्कैन और अन्य जांच के लिए ले जाया गया। परिजनों का कहना है कि इस दौरान कोई उन्नत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं थी, जिससे मरीज की जान को खतरा था।

सिस्टम और जांच प्रक्रिया पर सवाल

परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कई महीनों से सिर की चोट से संबंधित मामलों में जांच लंबित है, जबकि दूसरे अस्पतालों में जांच जल्दी पूरी हो जाती है।

प्रशासन और अधिकारियों की प्रतिक्रिया

जिला कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने कहा कि निजी अस्पताल में आयुष्मान कार्ड के तहत गलत तरीके से इलाज और पैसों की हेराफेरी जैसी बातें सामने आई हैं। इसके संबंध में स्वास्थ्य विभाग की टीम गठित कर जांच कराई जाएगी। साथ ही पूर्व में लंबित मामलों में भी टीम गठित हो चुकी है और जांच प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

सीएमएचओ गरियाबंद यूएस नवरत्न ने बताया कि फरवरी माह में संबंधित अस्पताल को आईसीयू इलाज की विधिवत अनुमति दी गई है, जबकि यह मामला जनवरी माह में हुए सडक़ हादसे से जुड़ा है। ऐसे में बिना वैध अनुमति यदि आयुष्मान कार्ड के तहत आईसीयू इलाज दर्शाया गया है, तो यह जांच का विषय है।

उन्होंने कहा कि आयुष्मान कार्ड से संबंधित गड़बड़ी की जांच के लिए टीम गठित कर एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई की जाएगी और आरोप सही पाए जाने पर आयुष्मान कार्ड निरस्त करने तक की कार्रवाई की जाएगी। वहीं अस्पताल प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गयाए लेकिन संपर्क नहीं हो सका।