हिमाचल में हो रही भारी बारिश की वजह से यमुना नदी उफान पर है। हरियाणा के यमुनानगर स्थित हथिनीकुंड बैराज से यमुना नदी में पानी छोड़ा गया है। आलम ये है कि वहां से डायवर्ट किए गए पानी में मगरमच्छ देखा गया है। वहां से बाढ़ के पानी में बहकर इस तरफ मगरमच्छ आ गए हैं।
हिमाचल में हो रही भारी बारिश की वजह से यमुना नदी उफान पर है। हरियाणा के यमुनानगर स्थित हथिनीकुंड बैराज से पांच लाख क्यूसेक का पानी छोड़ा गया था। इस मॉनसून में यमुना नदी का ये अब तक का सबसे अधिक जलस्तर है। मगर, इसका इसर दिल्ली-एनसीआर की तरफ भी देखने को मिल रहा है। खादर के खेत बाढ़ के पानी में डूब गए हैं। वहीं इस बाढ़ के पानी में मगरमच्छ भी बह कर इस तरफ आ गए हैं। गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में ये मगरमच्छ तैरते हुए दिखाई दिए हैं। इससे ग्रामीणों में दहशत है। यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर और मगरमच्छ देखे जाने पर बागपत से लेकर दिल्ली तक अलर्ट जारी कर दिया गया है।
दहशत में ग्रामीण इलाके के लोग
गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र के पचायरा गांव में बाहर की तरफ से यमुना नदी का पानी बहता है। यहां पिछले कई दिनों से नदी में कई मगरमच्छा देखे जा चुके हैं। विशालकाय मगरमच्छ यमुना नदी की धारा में बने मिट्टी के टापू पर बैठे देखे गए हैं। इसके अलावा मगरमच्छ बाढ़ के पानी में तैरते हुए भी पाए गए हैं। मगरमच्छ के देखे जाने से ग्रामीणों में दहशत है। किसान खादर खेत की तरफ जाने से भी डर रहे हैं।
बागपत के खेतों में घुसा पानी
हरियाणा राज्य के यमुनानगर में हथिनीकुंड बैराज है। 11 अगस्त को नदी का जलस्तर 1 लाख 82 हजार 297 क्यूसेक पर पहुंच गया था। इस बरसाती सीजन का यह अब तक का सबसे ज्यादा रिकॉर्ड किया जाने वाला पानी का लेवल है। नदी में बहुत ज्यादा पानी आने की वजह से हथिनी कुंड बैराज से यूपी और दिल्ली के लिए निकलने वाली नहरों को बंद कर सारा पानी दिल्ली की तरफ डाइवर्ट कर दिया गया। पांच दिन पहले करीब पांच लाख क्यूसेक पानी इस बैराज से यमुना नदी में डायवर्ट किया गया है। इससे उत्तर प्रदेश के बागपत, गाजियाबाद और दिल्ली के कुछ इलाकों में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ गया है।
गाजियाबाद के 6 गांव में अलर्ट
नदी का जलस्तर बढ़ने से गाजियाबाद के पचायरा, सूंगरपुर, हरमपुर, अलीपुर, बदरपुर, नौरसपुर में प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। दिल्ली में यमुना नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। वहीं, बागपत जिले के जागोस, टांडा, सुभानपपर, कुरड़ी, छपरौली, बागपत, कोताना, काठा, पाली गांव जलस्तर बढ़ने से प्रभावित हुए हैं।