डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भारत बंद के दौरान हुए हिंसक प्रदर्शन पर खुलकर बोले।
गाजियाबाद। देश की सबसे लंबी रोड को लेकर सपा के सुप्रीमों और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तरफ से ट्विटर पर किए iगए पोस्ट ‘राम राम जपना’ का डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने बखूबी तरीके से जबाव दिया। उन्होंने कहा कि एलिवेटिड रोड के लिए सैफई से रुपया नहीं आया है। सपा ने अपने कार्यकाल में 5 जनपदों का विकास किया और भारतीय जनता पार्टी ने 75 जनपदों की तस्वीर बदली है।
वहीं कांग्रेस और बसपा पर भी डिप्टी सीएम जमकर कर बरसे। कश्यप जंयती के अवसर पर गाजियाबाद आगमन पर डिप्टी सीएम ने एक बार फिर से पीडब्लूडी के 900 करोड़ से अधिक की लागत के कामों का लोर्कापण किया।
राष्ट्रभक्तों की एकता को भंग करने की साजिश है
भारत बंद के नाम पर हुई हिंसा पर केशव प्रसाद मौर्या ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि राष्ट्रभक्तों की एकता को भंग करने के लिए साजिश की जा रही है। लेकिन ये साजिश कभी कामयाब नहीं हो पाएगी। जनता को अपनी आंखो को खुली रखना है। लोकसभा चुनाव में इसी तरीके की मजबूती फिर से दिखनी है।
60 साल वाले चार साल का हिसाब मांग रहे हैं
मोदी सरकार की तारीफ करते हुए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने कहा कि आज हर गरीब का बैंक एकाउंट है और उनके पास आशियाना है। कांग्रेस पार्टी ने साठ साल तक देश पर राज किया, आज अगर गरीब के उत्थान के लिए काम किया होता तो आज ऐसी हालत न होती। जन-धन योजना, घरेलू गैस और आवास योजना की शुरूआत न करनी पडती है। सरकार और आम आदमी के बीच में किसी तरीके की कोई दूरी नहीं है। जो वादे किए हैं उन्हे हर हाल में पूरे किया जाएगा।
मायावती और अखिलेश दोनों ने किया एक जैसा काम
सपा और बसपा पर निशाना साधते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि दोनों ने जनता को मूर्ख बनाने का काम किया। अपने कुछ चुनिंदा इलाके में विकास की ब्यार बही। बाकि जगह लोग बिजली और बाकि जरूरतों के लिए तरसते रहे। लेकिन भाजपा सरकार में सभी जगहों का विकास किया जा रहा है। बिना किसी भेदभाव के काम किया जा रहा है। भ्रष्टाचार की भेंट काम चढ़ जाते थे, अब ऐसा नहीं होगा।
आदतों को सुधार लें अधिकारी
प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने गाजियाबाद में घटाघंर रामलीला मैदान में कश्यप जंयती महारैली के मंच से अधिकारियों को भी कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि काम को ईमानदारी से करना शुरू कर दे। जो पहले से कर चुके हैं वो अच्छा है, नहीं तो आज प्रण ले लें। अपनी आदतों को अधिकारी बदल ले अगर कार्यकर्ता किसी सरकारी अधिकारी के पास में जाता है तो उसका काम होना चाहिए।