इंजीनियरिंग के छात्रों ने दृष्टिहीनों लोगों के लिए बनाया आधुनिक जूता
ग़ाज़ियाबाद. काइट कॉलेज के इंजीनियरिंग के छात्र ने एक पुरानी कहावत बदल दी है। पुरानी कहावत थी अंधे की लकड़ी एक मात्र सहारा, लेकिन आने वाले समय लोग कहा करेंगे दृष्टिहीन के जूते एक मात्र सहारा। जी हां, ये एक इंजीनियरिंग के छात्र ने कर दिखाया है। इस छात्र ने एक ऐसा मइक्रो इलेक्ट्रोनिक डिवाइस वाले जूते का निर्माण किया है, जिन्हें पहन कर दृष्टिहीन अपने रास्ते में आने वाली बाधाओं को जूते में लगे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से पहले ही पहचान लेंगे । इस जूते की तारीफ राज्यमंत्री ने भी की। यह जूता पूरी तरह से मेड इन इंडिया तकनीक पर आधारित है। इसे पहनने के बाद दृष्टिहीन रास्ते में आने वाली बाधा को जूते में लगे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट से उतपन्न हुए वाइब्रेशन और बीप की आवाज से पहचान लेगा, जिससे वो दुर्घनाओं से बच जाएगा। काइट कॉलेज के इंजीनियरिग के एक छात्र अस्त्तित्व ने इस जूट को तैयार किया है, जिसकी कीमत भी दो हजार रुपये तक आने की बात कही जा रही है ।
गाज़ियाबाद के मुरादनगर के KITE कॉलेज में गुरुवार लगे टेक्निकल मेले में इंस्टीट्यूट के हर विभाग के छात्रों ने भाग लिया । जिसका शुभारम्भ राज्यमंत्री आशुतोष टण्डन ने रिबन काट किया। इस मौके पर राज्यमंत्री ने सभी जगह पहुंचकर मेले में भाग ले रहे छात्रों के द्वारा बनाई गई टेक्निकल चीजों को देखा। मगर सबसे ज्यादा उनका ध्यान एक छात्र द्वारा बनाए गए दृष्टिहीनों के लिए उन जूतों को सराहा, जिन्हें पहनने के बाद दृष्टिहीन लोग आने वाली बाधा को 2 फिट पहले जी जान लेंगे । इस मौके पर उन्होंने प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार की टेक्निकल योजनाओं को भी जमकर सराहा ।