पीड़ित किसान नीरज ने बताया कि अधिग्रहण के समय हमारी 4400 रुपए प्रति वर्ग मीटर के रेट से मुआवजे की मांग थी, लेकिन 1100 रुपए के रेट से मुआवजा दिया गया।
गाजियाबाद। जिले में आवास विकास परिषद की मंडोला विहार आवासीय योजना के पीड़ित किसानों के अर्धनग्न आंदोलन का सोमवार को 27वां दिन है। इस आंदोलन का नेतृत्व किसान नेता मनवीर तेवतिया के द्वारा किया जा रहा था, लेकिन जिला प्रशासन द्वारा मनवीर तेवतिया को 17 मई 2017 से जिलाबदर कर दिया गया है। 7 महीनों से किसान नेता को किसानों के मध्य नहीं आने दिया गया। किसानों ने बताया कि प्रशासन ने हमारे नेता मनवीर तेवतिया पर जिलाबदर की अवधि को 6 दिसंबर से 5वीं बार डेढ़ महीने के लिए बढ़ा दिया है। जिसके विरोध में हमने अर्धनग्न होकर धरना देना शुरू किया है। किसानों का कहना है कि जब तक हमारे नेता मनवीर तेवतिया पर से हमारे बीच आने की पाबंदी नहीं हटाई जाएगी हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा।
पीड़ित किसान महेंन्द्र सिंह त्यागी ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि हमारा यह आंदोलन सपा सरकार के समय से चल रहा है उस समय हमारे जिले के भाजपा नेताओं ने हमें आश्वासन दिया कि हमारी सरकार आने दो हम आपकी मदद करेंगे, लेकिन सरकार आने के बाद सख्ती शुरु हो गई। इससे पहले इस सत्याग्रह आंदोलन को भाजपा नेताओं ने तन-मन और धन से सहयोग किया और मनवीर तेवतिया की हां में हां बोली गई और खुद की सरकार बनते ही किसानों और किसान महिलाओं पर लाठीचार्ज कराया। पीड़ित अर्धनग्न किसानों का कहना है कि शासन-प्रशासन द्वारा हमारी मांग को अनदेखा करके हमारे सर्दी लगने से मरने का इंतजार किया जा रहा है।
सर्किल रेट के 4 गुने मुआवजे की मांग को लेकर शुरू किया है आंदोलन
पीड़ित किसान नीरज त्यागी ने बताया कि अधिग्रहण के समय हमारी 4400 रुपए प्रति वर्ग मीटर के रेट से मुआवजे की मांग थी, लेकिन 1100 रुपए प्रतिवर्ग मीटर का मुआवजा दिया गया। उसके बाद सरकार ने पैरीफेरल एक्सप्रेसवे के लिए हमारे आस-पास के अन्य गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया तो उन्हें सर्किल रेट का चौगुना मुआवजा दिया गया है। इसलिए हमारी मांग है कि सरकार हमें भी सर्किल रेट का चौगुना मुआवजा दे।
ये है मामला
आपको बता दें कि आवास विकास परिषद गाजियाबाद द्वारा मंडोला विहार आवासीय योजना के जिले के लोनी ब्लॉक के 6 गांव की लगभग 2612 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था। अधिग्रहण की प्रक्रिया सन 2010 में पूरी की गई थी। इसके लिए प्रभावित किसानों को 11 सौ रुपये प्रतिवर्ग मीटर की दर से मुआवजा दिया गया था। मुआवजे का भुगतान करते समय परिषद ने किसानों से एग्रीमेंट भी कराया था। इसमें किसानों को छह प्रतिशत विकसित भूमि वापस देने एवं प्रभावित गांवों को पूरी तरह विकसित करने की शर्तें हैं। मुआवजे का भुगतान करने के बाद परिषद ने मंडोला आवासीय योजना को विकसित करना शुरू किया था।