डीडीए के फ्लैट की अचानक भरभरा कर गिरी छत
गाजियाबाद. फ्लैट निर्माण में घटिया मैटेरियल इस्तेमाल करने का खामियाजा बायर्स को न सिर्फ अपनी घाढ़ी कमाई लुटाकर चुकानी पड़ रही है, बल्की उनकी जान भी खतरे में पड़ जाती है। ऐसा ही एक नजारा गाजियाबाद में देखने को मिला। गाजियाबाद के साहिबाबाद इलाके में डीडीए की फ्लैट नंबर 474 की एक छत अचानक ही भरभरा कर गिर गई। गनीमत रही कि इस दौरान कोई हताहत नहीं हुआ। लेकिन घर में रखा सामान टूट-फूट गया। जैसे ही लोगों ने इसकी खबर सुनी तो लोगों की मौके पर भीड़ मौके जुट गई । आनन-फानन में स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को सूचित किया गया। सूचना के आधार पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया ।
बहराल शुरुआती जांच में जीडीए की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। दरअसल, फ्लैट ज्यादा पुराना भी नहीं है। बताया जाता है कि यह फ्लैट मात्र 20 साल पुराना है। ऐसे में बिना किसी बारिश या भूकंप के इस तरह अचानक ही भर भराकर गिर जाना जीडीए के भवनों में इस्तेमाल होने वाली मैटेरियल की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़ा करता है। बताया जा रहा है कि फ्लैट का मालिक दिल्ली में रहता है और उसने यहां यह फ्लैट एक महिला को किराए पर दिया हुआ था । लेकिन मंगलवार की सुबह इस फ्लैट की छत अचानक ही भरभरा कर गिर गई । गनीमत यह रही कि मलबे के नीचे दबकर कोई हताहत नहीं हुआ। वरना जिस तरह से अचानक यह छत गिरी है और पूरा मलबा बिस्तर के ऊपर ही पड़ा है। उसे देखकर इस की भयावहता का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
इस फ्लैट की छत अचानक गिरने के बाद भी किसी के हताहत नहीं होने की खबर ने इस कहावक को चरितार्थ कर दिया है। जाको राखे साइयां, मार सके ना कोई। मिली जानकारी के अनुसार मंजू पांडे नाम की एक महिला अपने परिवार के साथ इस फ्लैट में किराए पर रहती हैं और इस फ्लैट का मालिक दिल्ली में रहता है। फिलहाल घर के सभी लोगों को बाहर निकाल दिया गया है और मलबे को हटाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि जिस वक्त यह छत अचानक गिरी तो घर के सभी लोग उस वक्त कमरे से बाहर थे। वरना बड़ा हादसा हो सकता था।