घोटालों का गढ़ बन चुके नगर निगम में आज से दो दिवसीय बोर्ड बैठक शुरू हुई। बैठक में विकास कार्यों के लिए सालाना बजट पर चर्चा होनी थी, लेकिन पार्षद, अफसर और कर्मचारियों के हंगामे की भेट चढ़ गई। महापौर को पहले पार्षदों के हंगामा करने पर 15 मिनट के लिए बैठक को स्थगित करना पड़ा। उसके बाद में कर्मचारियों ने विरोध करना शुरू कर दिया। जिसके बाद में बोर्ड बैठक को अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
नगर निगम में पार्षदों और अफसरों के बीच में विकास कार्यों को लेकर बहस हो रही थी। तभी एक महिला पार्षद ने कह दिया कि जिस तरीके से सभी पार्षदों की टेबल के सामने नाम लिखे हुए हैं। अधिकारियों के सामने भी लिखे होने चाहिएं। इसके अलावा बाहरी लोग भी यहां पर आए हुए हैं। इस पर नगर आयुक्त आयुक्त अब्दुल समद ने टिप्पणी की कि पार्षद पति तो निगम आते हैं अधिकारी की पत्नी नहीं। इस पर अफसरों और पार्षदों के बीच हंगामा शुरू हो गया।
कर्मचारियों को बाहर किया तो बढ़ गया हंगामा
नगर आयुक्त अब्दुल समद ने बोर्ड बैठक में मौजूद कर्मचारियों से कहा कि जो लोग बोर्ड बैठक से सम्बन्धित नहीं हैं वो बाहर चले जाएं। इससे सभी कर्मचारियों ने खुद को अपमानित महसूस किया। आक्रोशित होकर सभी ने जोरदार हंगामा करना शुरू कर दिया और निगम को अपना धरना स्थल बना लिया।
बोर्ड बैठक में पार्षदों ने बिल्डरों के द्वारा विकसित की गई कॉलोनियों को निगम को हैंडओवर किए जाने पर बिल्डर से मूलभूत सुविधाओं को पूरा कराने के लिए कहा। पार्षदों ने आरोप लगाया कि अफसर औऱ बिल्डर मिलकर कॉलोनियों में काम के नाम पर लूट कर रहे हैं।
तीन पार्षद और अफसर करेंगे मामले की जांच
मेयर आशु वर्मा ने कहा कि किसी भी रूप से घोटालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कॉलोनी में बिल्डर के द्वारा की गई गड़बड़ के लिए तीन पार्षद और दो अफसरों की एक कमेटी गठित की जाएगी। वो गड़बड़ी पर अपनी रिपोर्ट तैयार करके देगी। लापरवाही मिलने वाले पर कारवाई की जाएगी।